
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में तमनार ब्लॉक के धौराभाठा इलाके में शनिवार (27 दिसंबर 2025) को हालात एकदम युद्ध जैसी हो गए। जिंदल पावर लिमिटेड को आवंटित गारे-पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के खनन, भूमि अधिग्रहण और कथित फर्जी जनसुनवाई के विरोध में पिछले 15 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे 14 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों और पुलिस के बीच जबरदस्त झड़प हुई।
क्या हुआ वहां?
धरना स्थल सीएचपी चौक (लिब्रा गांव) पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की।
ग्रामीणों ने पहले झूमा-झटकी, फिर पथराव शुरू कर दिया।
गुस्साई भीड़ ने पुलिस की बस, जीप, एम्बुलेंस समेत कई सरकारी वाहनों में आग लगा दी।
प्रदर्शनकारी जिंदल की कोल हैंडलिंग प्लांट (CHP) में घुसे, वहां कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया, ऑफिस में तोड़फोड़ की।
सबसे चौंकाने वाली घटना: ग्रामीण महिलाओं ने तमनार थाना प्रभारी महिला टीआई कमला पुसाम को घेरकर लाठियों-लातों से बुरी तरह पीटा। वह गंभीर रूप से घायल हुईं।
घायलों की संख्या:
8 पुलिसकर्मी (जिनमें एसडीओपी अनिल विश्वकर्मा, टीआई कमला पुसाम और एक कांस्टेबल शामिल)
कई ग्रामीण भी घायल। घायलों को रायगढ़ रेफर किया गया, हालत स्थिर बताई जा रही है।
ग्रामीणों का गुस्सा क्यों भड़का?
ग्रामीणों का कहना है:
यह परियोजना उनके जंगल, जमीन और पानी को तबाह कर देगी।
सैकड़ों परिवारों का विस्थापन तय है।
8 दिसंबर को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई नियमों के खिलाफ और फर्जी थी – बिना उनकी सहमति के।
वे शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे, लेकिन पुलिस ने जबरन हटाने की कोशिश की, जिससे माहौल बिगड़ा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधा:
“सरकार कॉरपोरेट को बचाने के लिए आदिवासियों पर दमन कर रही है। शांतिपूर्ण आंदोलन को लाठीचार्ज और गिरफ्तारी से कुचला जा रहा है।”
प्रशासन का पक्ष
जिला प्रशासन का कहना: भीड़ में असामाजिक तत्व घुसे, जिससे हालात बेकाबू हुए।
पथराव और आगजनी में शामिल लोगों की पहचान हो रही है, सख्त कार्रवाई होगी।
भारी पुलिस बल तैनात, इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
वीडियो और तस्वीरें वायरल
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है – महिला टीआई को बीच सड़क पर पीटते हुए ग्रामीण, जलती गाड़ियां, पत्थरबाजी का मंजर। पूरा इलाका दहशत में है।
यह घटना फिर साबित करती है कि विकास के नाम पर जब स्थानीय लोगों की आवाज दबाई जाती है, तो विरोध हिंसा में बदल जाता है।
क्या सरकार अब ग्रामीणों की सुनवाई करेगी या दमन जारी रखेगी? समय बताएगा।
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स्थिति अभी भी नाजुक है। अपडेट्स के लिए बने रहें! 🔥🚨








