
रायपुर, 4 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर किसानों और सरकार के बीच बढ़ती असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। राज्य सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में वास्तविक खरीदी में भारी कमी दर्ज की गई है, जिससे किसान आंदोलन की तैयारी में जुटे नजर आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 160 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन केवल 149.25 लाख मीट्रिक टन ही खरीदा जा सका। इसी तरह, वर्तमान वर्ष 2025-26 के लिए भी 160 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य था, जो अब तक केवल 139.8 लाख मीट्रिक टन तक सीमित रह गया।
यह कमी न केवल किसानों की आय पर असर डाल रही है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी झटका पहुंचा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनियमितताओं, बाजार में निजी व्यापारियों की बढ़ती सक्रियता और सरकारी खरीदी प्रक्रिया में देरी जैसे कारकों ने इस कमी को जन्म दिया है। किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, जिसमें खरीदी की समय सीमा बढ़ाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पूर्ण खरीदी सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
वर्षवार तुलना: लक्ष्य बनाम वास्तविकता
वर्ष 2024-25 2025-26
लक्ष्य (लाख मीट्रिक टन) 160 160
वास्तविक खरीदी 149.25 139.8
कमी (लाख मीट्रिक टन) 10.75 20.2
कुल मिलाकर, दो वर्षों में लगभग 31 लाख मीट्रिक टन की कमी हो चुकी है, जो राज्य के धान उत्पादन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छत्तीसगढ़, जो ‘धान का कटोरा’ के नाम से जाना जाता है, में धान खरीदी न केवल किसानों की आजीविका का आधार है, बल्कि खाद्यान्न सुरक्षा के लिए भी अहम है।
किसानों ने कहा, “सरकार ने वादे किए थे, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हो रहा। अगर जल्द सुधार नहीं हुए, तो हम बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।” वहीं, राज्य के कृषि मंत्री ने स्थिति को ‘अस्थायी’ बताते हुए आश्वासन दिया है कि शेष खरीदी को तेज किया जाएगा।
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