
कवर्धा, 4 फरवरी 2026 : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की समय सीमा दो दिनों के लिए बढ़ाने के बीच कवर्धा जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 7 करोड़ रुपये मूल्य के धान के गबन का आरोप लगा, तो जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) अभिषेक मिश्रा ने इसका ठीकरा चूहों और दीमकों पर फोड़ दिया। इस ‘अजब’ बयान ने पूरे प्रदेश में हंगामा मचा दिया, जिसके चलते मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन का आदेश प्रबंध संचालक (राज्य स्तर, रायपुर) द्वारा 3 फरवरी को जारी किया गया, जो मीडिया में भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना जानकारी देने के आरोप पर आधारित है।
घटना का पूरा ब्योरा
कवर्धा में धान खरीदी प्रक्रिया के दौरान करीब 7 करोड़ रुपये के धान की कमी सामने आई। स्थानीय गोदामों में स्टॉक वेरिफिकेशन के दौरान यह शॉर्टेज पकड़ा गया, जिसकी जांच शुरू हो गई। 7 जनवरी 2026 को मीडिया से बातचीत के दौरान डीएमओ अभिषेक मिश्रा ने धान के लापता होने का कारण ‘मौसम की मार’ और ‘चूहे-दीमक द्वारा खाए जाने’ बताया। उन्होंने कहा कि भारी बारिश और कीटों के प्रकोप ने धान को नुकसान पहुंचाया, जिससे यह घाटा हुआ।
इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया भरी। यूजर्स ने इसे ‘हास्यास्पद’ और ‘प्रशासनिक लापरवाही’ का प्रतीक बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे घोर घोटाले का संकेत माना। कांग्रेस और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) ने कवर्धा में जोरदार प्रदर्शन किए। विपक्ष नेताओं ने डीएमओ के बयान को ‘सरकारी उदासीनता’ का नमूना बताते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, ‘चूहों का राज कैसे चलेगा, दोषी अधिकारी को सजा दो!’
प्रशासन की कार्रवाई और हड़कंप
प्रबंध संचालक रायपुर ने डीएमओ के बयान को ‘भ्रामक’ करार देते हुए तत्काल निलंबन का आदेश जारी किया। आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, “यह बयान न केवल गलत था, बल्कि जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाला था। जांच पूरी होने तक सभी संबंधित अधिकारियों पर नजर रखी जाएगी।” निलंबन के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। नए डीएमओ की नियुक्ति जल्द होने की संभावना है, जबकि धान घोटाले की गहन जांच चल रही है।
धान खरीदी पर असर
छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए धान खरीदी की अंतिम तिथि 2 दिनों के लिए बढ़ा दी है। राज्य में कुल 2.5 करोड़ मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य है, लेकिन विभिन्न जिलों में स्टोरेज और वेरिफिकेशन की समस्याएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कवर्धा जैसी घटनाएं न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि किसानों का भरोसा भी तोड़ती हैं।
प्रदेश के कृषि मंत्री ने मामले पर चुप्पी साधे रखी है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि उच्च स्तरीय बैठक में इसकी समीक्षा होगी। फिलहाल, कवर्धा के किसान संगठन ने प्रशासन से पारदर्शी जांच और मुआवजे की मांग की है।









