
कोरबा, 5 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कुपोषण के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की पोषण स्थिति का वास्तविक आकलन करने के उद्देश्य से 9 फरवरी से 18 फरवरी 2026 तक सभी 2602 आंगनवाड़ी केंद्रों में “वजन त्योहार” का आयोजन किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित यह अभियान कुपोषित बच्चों की समय रहते पहचान और उन्हें पोषण-सेवाओं से जोड़ने पर केंद्रित होगा, जो जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
अभियान का स्वरूप: वजन-ऊंचाई मापन से पोषण मूल्यांकन
वजन त्योहार के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत और अपंजीकृत सभी बच्चों का वजन एवं ऊंचाई मापा जाएगा। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कुपोषित या जोखिम वाले बच्चों की पहचान की जाएगी। इन बच्चों को पोषण परामर्श, स्वास्थ्य मार्गदर्शन और विभागीय योजनाओं जैसे एकीकृत बाल विकास सेवाओं (ICDS) से जोड़ा जाएगा। उद्देश्य है कि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित हो सके।
विभाग ने अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। निर्देशानुसार, कोई भी पात्र बच्चा योजना से वंचित न रहे, इसलिए अपंजीकृत बच्चों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। यह अभियान न केवल व्यक्तिगत स्तर पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करेगा, बल्कि समुदाय में पोषण जागरूकता भी फैलाएगा।
कलेक्टर के निर्देश: संवेदनशीलता और सुचारू व्यवस्था पर जोर
जिले के कलेक्टर कुणाल दुदावत ने वजन त्योहार की तैयारियों को लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्धारित अवधि में अभियान को संवेदनशीलता, सुचारूता और प्रभावी ढंग से संचालित करने के सख्त निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पात्र बच्चे को छूटने न दिया जाए, ताकि कुपोषण की जड़ें कमजोर हों। बैठक में सीडीपीओ, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कलेक्टर दुदावत ने आमजन से अपील की है कि माता-पिता 9 से 18 फरवरी के बीच अपने क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को अनिवार्य रूप से लाएं। उन्होंने कहा, “यह बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में ठोस कदम है। सामूहिक सहयोग से हम कुपोषण को जड़ से समाप्त कर सकते हैं।”
कुपोषण मुक्ति की दिशा में मील का पत्थर
कोरबा जिले में कुपोषण दर अभी भी चिंताजनक स्तर पर है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में। वजन त्योहार जैसे अभियान से न केवल तत्काल हस्तक्षेप संभव होगा, बल्कि लंबे समय में पोषण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आकलन से बच्चों की ग्रोथ चार्ट में सुधार आएगा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य बेहतर होगा।
यह पहल राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan) के अनुरूप है, जो छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। जिला प्रशासन ने अभियान के दौरान जागरूकता रैलियां और शिविर भी आयोजित करने की योजना बनाई है। सफलता के लिए सभी हितधारकों से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की गई है।









