
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और महासमुंद जिले में सोमवार (29 दिसंबर 2025) की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारतमाला परियोजना के तहत हुए कथित भूमि अधिग्रहण घोटाले में धमाकेदार एक्शन लिया है! ED की टीमें एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं, जहां दस्तावेज़, डिजिटल डेटा और बैंक रिकॉर्ड्स की गहन तलाशी जारी है।
यह कार्रवाई रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (Bharatmala Pariyojana का हिस्सा) के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजे के भुगतान में हुई भारी अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है।
मुख्य टारगेट कौन?
- हरमीत सिंह खनूजा (प्रमुख भूमि दलाल) का लॉ-विस्टा सोसाइटी, रायपुर स्थित आवास – यहां ED की टीम सुबह से ही डेरा डाले हुए है।
- जसबीर सिंह बग्गा (महासमुंद के प्रमुख व्यवसायी, होंडा डीलरशिप संचालक) का मेघ बसंत इलाका स्थित घर।
- हरमीत खनूजा के सहयोगी, कुछ सरकारी अधिकारी और प्रभावित जमीन मालिकों के ठिकाने भी रडार पर।
ED के अनुसार, 2020-2024 के बीच मुआवजे में फर्जीवाड़ा, इन्फ्लेटेड क्लेम और मध्यस्थों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई। राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB/EOW) ने पहले ही जांच में ₹32 करोड़ से ₹43 करोड़ तक की गड़बड़ी पकड़ी थी, जिसमें कई ब्रोकर और अधिकारी आरोपी बन चुके हैं। अब ED PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत धन शोधन के एंगल से जांच तेज कर रही है।
क्या हो रहा है छापेमारी में?
- महत्वपूर्ण दस्तावेज़, प्रॉपर्टी पेपर्स, बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड जब्त किए जा रहे हैं।
- डिजिटल डिवाइस और कंप्यूटर डेटा खंगाला जा रहा है।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम – मीडिया और बाहरी लोगों को अंदर जाने की मनाही
विपक्ष (कांग्रेस) ने इस घोटाले को ₹350 करोड़ तक का बताया है और CBI जांच की मांग की है। यह मामला छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई और तेज कर सकता है।
ED की यह कार्रवाई जारी है और आने वाले घंटों-दिनों में बड़ी गिरफ्तारियां, एसेट अटैचमेंट या और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। क्या यह घोटाला और ऊंचे स्तर तक पहुंचेगा? मामला अब सिर्फ छत्तीसगढ़ नहीं, बल्कि पूरे देश की नजरों में है!
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