
*कोरबा (छत्तीसगढ़), 19 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के युवाओं में एक नया खतरनाक नशा तेजी से फैल रहा है। इसका नाम है ‘गोगो’। यह साधारण दिखने वाला बारीक, पतला और पारदर्शी कागज है, जिसमें भांग, चरस, गांजा, अफीम और स्मैक जैसे नशीले पदार्थ भरे जाते हैं। इसे सिगरेट की तरह पीया जाता है। बाजार में इसकी कीमत मात्र 8 से 15 रुपये तक है, जिस वजह से यह किशोरों और युवाओं के बीच आसानी से पहुंच रहा है।
नशा मुक्ति केंद्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 14 से 20 वर्ष के आयु वर्ग के किशोर और युवा इस नशे की सबसे ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। पहले जहां नशा मुख्य रूप से सिगरेट या अन्य पारंपरिक तरीकों तक सीमित था, अब ‘गोगो पेपर’ ने नशे का नया ट्रेंड शुरू कर दिया है। युवा इसे समूह में पीते हैं और इसे पब जैसा माहौल मानकर अपनी ‘शान-स्टेटस’ से जोड़ने लगे हैं। लड़कियां भी अब खुलेआम इस नशे का सेवन करती नजर आ रही हैं।
कैसे पहुंच रहा है ‘गोगो’?
- पान मसाला की दुकानों और ठेलों पर छिपाकर बिक्री हो रही है।
- युवा चाय या ठंडे पेय के साथ बैठकर इसे पीते हैं।
- छोटी और साधारण पैकिंग होने से इसे आसानी से छिपाया जा सकता है।
- कोरबा में भी पान ठेलों के जरिए युवाओं तक इसकी आसान पहुंच के संकेत मिल रहे हैं।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह न केवल युवाओं के स्वास्थ्य को बर्बाद करेगा, बल्कि अपराध दर में भी वृद्धि कर सकता है। नशे की लत के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
स्वास्थ्य और सामाजिक खतरा
‘गोगो’ जैसे सूखे नशे के सेवन से युवाओं का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। लंबे समय तक इस्तेमाल से लत लग जाती है और इससे बचना मुश्किल हो जाता है। अभिभावकों से अपील की जा रही है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर सख्त नजर रखें। अगर किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव नजर आए (जैसे स्कूल से अनुपस्थिति, दोस्तों का चेंज होना, या संदिग्ध पैकेट्स) तो तुरंत प्रशासन या पुलिस को सूचित करें।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि पान ठेलों और छोटे विक्रेताओं पर सख्त निगरानी रखनी होगी। ऐसे चिन्हित स्थानों पर लगातार छापेमारी और नशे के सौदागरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जरूरत है। राज्य में पहले रायपुर पुलिस ने ‘गोगो पेपर’ और संबंधित सामग्री के अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई की है, जिसमें कई दुकानें सील की गईं और सप्लाई चेन का पता लगाया गया।
कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने और पुलिस-प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की मांग बढ़ रही है। ‘नशा मुक्त छत्तीसगढ़’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं को इस नए खतरे से बचाना अत्यंत जरूरी है।
अभिभावकों के लिए सलाह:
अपने बच्चों से खुलकर बात करें। उनके दोस्तों और गतिविधियों पर नजर रखें। संदिग्ध स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या नशा मुक्ति केंद्र से संपर्क करें।
यह नशा सिर्फ एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा है। समय रहते सख्त कदम उठाए गए तो ही युवा पीढ़ी को बचाया जा सकता है।









