
ग्वालियर, 03 जनवरी 2026 – संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की फोटो जलाने और अपमानजनक नारेबाजी के गंभीर मामले ने ग्वालियर में सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया है। इस प्रकरण में पूर्व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित 7 नामजद और एक अज्ञात आरोपी पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ है।
आरोप है कि 1 जनवरी 2026 को एक अनधिकृत जुलूस के दौरान डॉ. अंबेडकर की तस्वीर जलाई गई और अपमानजनक नारे लगाए गए। क्राइम ब्रांच ने गुरुवार रात तुरंत कार्रवाई करते हुए एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। शुक्रवार को कोर्ट में पेशी पर एट्रोसिटी विशेष न्यायाधीश के अवकाश होने के कारण JMFC कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
कोर्ट के बाहर स्थिति तनावपूर्ण रही। आरोपियों को ले जाते समय उनके समर्थकों ने उत्तेजक नारे लगाए, जिससे विवाद की आशंका बढ़ गई।
हाईकोर्ट में सुनवाई
अब इस मामले में जमानत याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच सुनवाई करेगी। दोनों पक्षों (दलित संगठन और आरोपी समर्थक) के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
दलित संगठनों का विरोध
घटना के बाद भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी सहित विभिन्न दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर ढाई घंटे से अधिक धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने एफआईआर को अपर्याप्त बताते हुए एडवोकेट अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर
(संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का प्रतिनिधित्व करने वाली तस्वीरें)
एडवोकेट अनिल मिश्रा
(आरोपी एडवोकेट अनिल मिश्रा की कुछ तस्वीरें, जो ग्वालियर में चर्चित हैं)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, ग्वालियर बेंच
(हाईकोर्ट भवन, जहां स्पेशल बेंच सुनवाई करेगी)
पुलिस अलर्ट और सुरक्षा
(कोर्ट केस में पुलिस की हाई अलर्ट तैनाती की तस्वीर)
यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और जातिगत संवेदनशीलता से जुड़ा हो गया है। आने वाली सुनवाई में क्या फैसला आता है, यह देखना होगा, लेकिन फिलहाल शहर में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन सतर्क है।
जय भीम! जय संविधान! 🇮🇳







