
इंदौर (छत्तीसगढ़ से बाहर मध्य प्रदेश का प्रमुख शहर): देश के सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा से सप्लाई होने वाले पानी में दूषित होने से हुई मौतों और बीमारियों का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में गंभीरता से उठा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के जवाब को “असंवेदनशील” करार देते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इस घटना ने इंदौर की छवि को पूरे देश में गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां:
इंदौर स्वच्छता में नंबर 1 है, लेकिन यहां ऐसी घटना होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाला है।
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पेयजल जीवन का मौलिक अधिकार है, इससे किसी भी हाल में समझौता नहीं हो सकता।
यदि जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश।
सरकार और नगर निगम को विस्तृत जवाब तथा नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश।
घटना का विवरण और राजनीतिक घमासान: भागीरथपुरा में पाइपलाइन लीकेज और सीवर के मिश्रण से दूषित पानी सप्लाई होने से उल्टी-दस्त, डायरिया जैसी बीमारियां फैलीं। मौतों की संख्या अलग-अलग रिपोर्ट्स में 7 से 17 तक बताई जा रही है (सरकारी रिपोर्ट में कम, स्थानीय दावों में ज्यादा), जबकि सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। नए मरीज भी लगातार सामने आ रहे हैं – सोमवार को ही 38 नए केस दर्ज हुए।
राजनीतिक तनाव चरम पर:
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित नेताओं के इलाके दौरे पर पुलिस ने भारी बंदोबस्त किया। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई, वज्र वाहन तैनात रहे, जिससे कांग्रेसियों को घेराबंदी का सामना करना पड़ा।
बाद में कुछ नेताओं को अनुमति मिली और वे पीड़ित परिवारों से मिले।
कांग्रेस ने इसे “सरकारी हत्या” करार दिया और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी और हंगामा भी हुआ।
यह त्रासदी इंदौर की स्वच्छता की छवि पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पानी सिर्फ इंदौर नहीं, पूरे प्रदेश का अधिकार है। प्रशासन अब टैंकरों से पानी सप्लाई कर रहा है, लेकिन पीड़ितों का दर्द और सवाल बरकरार हैं।







