
रायपुर/नई दिल्ली, 6 जनवरी 2026: कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की मूल भावना और काम के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नाम से एक बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह अभियान 10 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें पार्टी संसद से लेकर पंचायत स्तर तक विरोध प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस का मुख्य आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम (VB-G RAM G Act) ने 2005 के मनरेगा को खत्म कर दिया है। नया कानून पंचायतों के काम तय करने के अधिकार को छीन रहा है, केंद्रीकरण बढ़ा रहा है और ग्रामीण मजदूरों (खासकर महिलाओं, दलितों-आदिवासियों) की रोजी-रोटी पर हमला है। पार्टी इसे “दान” बनाने की कोशिश बता रही है, जबकि मनरेगा संवैधानिक गारंटी है।
प्रमुख मांगें
- VB-G RAM G एक्ट को पूरी तरह वापस लिया जाए।
- मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जाए।
- काम का अधिकार और पंचायतों की स्वायत्तता बरकरार रहे।चरणबद्ध कार्यक्रम (छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में लागू)
- 8 जनवरी: प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) स्तर पर तैयारी बैठकें।
- 10 जनवरी: सभी जिलों में जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस – अभियान की शुरुआत।
- 11 जनवरी: एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध (जिला मुख्यालय या गांधी/अंबेडकर प्रतिमा के पास)।
- 12-29 जनवरी: पंचायत स्तर पर जनसंपर्क – ग्राम चौपालें, खड़गे और राहुल गांधी के पत्रों का वितरण (ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों, मनरेगा मजदूरों को), नुक्कड़ सभाएं और पैंफलेट।
- 30 जनवरी (शहीद दिवस): वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना।
- 31 जनवरी-6 फरवरी: जिला स्तर पर ‘मनरेगा बचाओ’ धरना (डीसी/डीएम कार्यालय के सामने)।
- 7-15 फरवरी: राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव।
- 16-25 फरवरी: क्षेत्रीय AICC स्तर की ‘मनरेगा बचाओ’ रैलियां (चार जोनल रैलियां)।
कांग्रेस ने अजय माकन को इस अभियान की समन्वय समिति का संयोजक बनाया है। पार्टी नेता जैसे जयराम रमेश ने इसे किसान आंदोलन की तरह बड़ा बनाने की बात कही है। छत्तीसगढ़ जैसे ग्रामीण-प्रधान राज्य में यह आंदोलन मजदूरों और महिलाओं (जिनकी मनरेगा में 60% से ज्यादा भागीदारी है) के बीच तेजी से फैल सकता है।
कांग्रेस का कहना है – “मनरेगा बचेगा, तभी मजदूर बचेगा!” ✊







