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कोरबा में SECL दीपका खदान मुआवजा घोटाले में बड़ा एक्शन: CBI की नई दबिश, बैंक खातों की जांच तेज

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डी.के. सरजाल

 

कोरबा (छत्तीसगढ़), 9 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के कोयला क्षेत्र में एक बार फिर भ्रष्टाचार की गूंज गूंज रही है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका खदान विस्तार परियोजना के लिए मलगांव गांव में जमीन अधिग्रहण के नाम पर हुए कथित मुआवजा घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को हरदीबाजार क्षेत्र में अचानक दबिश दी। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है और बड़े खुलासों की आशंका जताई जा रही है।

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घोटाले की पृष्ठभूमि

यह मामला सालों पुराना है, लेकिन अब जांच अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। SECL की दीपका खदान विस्तार के लिए मलगांव (और आसपास के इलाकों) में 2004 के आसपास जमीन अधिग्रहण हुआ था। 2022-23 में संपत्तियों का सर्वे किया गया, लेकिन जांच में 152 फर्जी मकान (घर) सामने आए जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे, फिर भी इन्हें मुआवजा पात्र बनाकर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।

जुलाई 2025 में ही इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था, जहां जिला प्रशासन और SECL की जांच में पुष्टि हुई कि राजस्व विभाग और SECL के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों में हेरफेर किया गया। फर्जी दावेदारों को अपात्र बताकर मुआवजा दिलाने का खेल चला।

CBI की पिछली और वर्तमान कार्रवाई

नवंबर 2024 में CBI ने पहले ही दो स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें INTUC के जिला अध्यक्ष खुशाल (श्यामू) जायसवाल और व्यवसायी राजेश जायसवाल के घर-दफ्तर शामिल थे।

जांच में सामने आया कि खुशाल जायसवाल को 1.60 करोड़ और राजेश जायसवाल को 1.83 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी/अधिक मुआवजा दिलाया गया। कुल मिलाकर यह घोटाला 100 करोड़ रुपये तक का बताया जा रहा है, जबकि शुरुआती जांच में 3.44 करोड़ का फर्जी मुआवजा ही पकड़ा गया था।

नवंबर 2025 में CBI ने इन दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया।

अब जनवरी 2026 में CBI ने फिर हरदीबाजार में दबिश दी। टीम ने संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए और खास तौर पर उन बैंक खातों व लेन-देन के इतिहास की गहन जांच शुरू की है, जिनके जरिए कथित काली कमाई का बंटवारा हुआ।

क्या हो सकता है आगे?

सूत्रों का कहना है कि जांच अब अंतिम दौर में है। CBI उन सभी बैंक ट्रांजेक्शन्स, खातों और लाभार्थियों की पड़ताल कर रही है, जिनसे अवैध भुगतान हुआ। इसकी आंच कई बड़े अधिकारी, राजस्व अमले और सफेदपोशों तक पहुंच सकती है। इलाके में अवैध संपत्ति बनाने वालों में खलबली मची हुई है।

जल्द ही बड़ी गिरफ्तारियां और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है। यह मामला एक बार फिर कोयला क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर रहा है, जहां जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के नाम पर सरकारी खजाने की लूट हो रही है।

CBI की यह सख्त कार्रवाई प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आगे की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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