
- कोरबा : रूंगटा कोल माइंस विस्तार के खिलाफ आदिवासियों का हुंकार, पुटी पखना में उमड़ी महापंचायत
तुलेश्वर मरकाम बोले– यह आदिवासी समाज को मिटाने की साजिश है!
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रूंगटा कोल माइंस के प्रस्तावित विस्तार के खिलाफ आदिवासी समाज ने एकजुट होकर बड़ा विरोध जताया है। पुटी पखना गांव में आयोजित महापंचायत में हजारों की संख्या में ग्रामीण और आदिवासी एकत्र हुए। इस जनसभा का मुख्य मुद्दा वन अधिकार पट्टा की मांग के साथ-साथ खदान विस्तार योजना का कड़ा विरोध रहा।
गोंगपा विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा,
“यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज को मिटाने की सुनियोजित साजिश है। जंगल, जल और जमीन हमारी आजीविका और संस्कृति का आधार हैं। खदान विस्तार से 13 से अधिक गांव प्रभावित होंगे, जहां हजारों आदिवासी परिवार विस्थापित हो सकते हैं। हम इस साजिश को कभी सफल नहीं होने देंगे।”
महापंचायत के प्रमुख बिंदु और मांगें:
वन अधिकार कानून (FRA) के तहत सभी पात्र परिवारों को पट्टा तत्काल जारी किया जाए।
रूंगटा कोल माइंस के विस्तार प्रस्ताव को पूरी तरह रद्द किया जाए।
आदिवासियों की सहमति के बिना कोई भी खनन गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
पर्यावरण, वन और स्थानीय आजीविका पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव की स्वतंत्र जांच हो।
महापंचायत में शामिल ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि खदान विस्तार से उनके जंगल नष्ट होंगे, जल स्रोत सूखेंगे और पारंपरिक खेती-बाड़ी-जंगल पर निर्भर जीवन खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज होगा।
यह महापंचायत जन आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें स्थानीय आदिवासी संगठन और प्रभावित गांवों के लोग सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। हाल के वर्षों में कोरबा और आसपास के जिलों में कोयला खनन विस्तार के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन यह महापंचायत अपनी व्यापकता और एकजुटता के कारण खासा चर्चित हो रही है।







