
मनेंद्रगढ़। कांग्रेस ने प्रयागराज माघ मेले में जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शाही स्नान से रोके जाने तथा उनके साथ हुए दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा का हिन्दू विरोधी और दोहरे चरित्र का स्पष्ट प्रमाण बताया है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि स्वयं को हिंदुओं का मसीहा बताने वाली भाजपा सरकार आज संतों और धर्माचार्यों का अपमान कर रही है। शंकराचार्य जी को अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है और वे 36 घंटे से अधिक समय से अनशन पर बैठे हैं, फिर भी सरकार ने उनसे संवाद करने का कोई प्रयास नहीं किया। यह केवल एक संत का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का अपमान है।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष प्रभा पटेल ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले 40 वर्षों से नियमित रूप से शाही स्नान करते आ रहे हैं। यह पहली बार है जब उन्हें इस अखंड धार्मिक परंपरा से रोका गया। मौनी अमावस्या का शाही स्नान सदियों पुरानी परंपरा है, जिसे न मुगलों ने रोका और न ही अंग्रेजों ने—फिर भाजपा सरकार को यह दुस्साहस कैसे हुआ?
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजकुमार केसरवानी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के संरक्षण में शंकराचार्य के शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उन्हें बाल पकड़कर घसीटा गया। उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि भाजपा धर्म के नाम पर राजनीति तो करती है, लेकिन धर्माचार्यों के सम्मान की उसे कोई परवाह नहीं।
ब्लॉक कांग्रेस मनेंद्रगढ़ शहर अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने कहा कि एक ओर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जेड-प्लस सुरक्षा दी जाती है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य के समर्थकों के साथ मारपीट होती है और शंकराचार्य को उनकी पालकी पर जाने तक की अनुमति नहीं दी जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा के लिए मोहन भागवत शंकराचार्य से बड़े हो गए हैं?
पार्षद स्वप्निल सिन्हा ने कहा कि शंकराचार्य जी का “अपराध” केवल इतना है कि वे व्यवस्थागत कमियों पर सवाल उठाते हैं, सरकार की आलोचना करते हैं, अयोध्या में आधे-अधूरे राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर आपत्ति जताते हैं, महाकुंभ की अव्यवस्थाओं और कोविड काल में गंगा में तैरती लाशों जैसे सच को सामने रखते हैं—इसीलिए भाजपा उन्हें निशाना बना रही है।









