
*रायपुर, 25 जनवरी 2026* – छत्तीसगढ़ में विकास की रफ्तार को झटका लगाने वाला एक और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के भूमि अधिग्रहण में हुए मुआवजा घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने कड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने विशेष न्यायालय (एसीबी), रायपुर में तीन गिरफ्तार पटवारियों के खिलाफ प्रथम पूरक चालान (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) पेश कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि इन आरोपियों की साजिश से राज्य सरकार को करीब 40 करोड़ रुपये की भारी आर्थिक क्षति पहुंची है।
यह घोटाला भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में गड़बड़ी का नंगा चेहरा दिखाता है, जहां सरकारी जमीन को निजी बनाकर मोटा मुआवजा हड़प लिया गया। एसीबी के अनुसार, आरोपी पटवारियों ने खाता दुरुस्ती, प्रपत्र-10 और आपत्ति निराकरण जैसे दस्तावेजों में हेरफेर कर मूल खसरा नंबरों को कृत्रिम उपखंडों में बांट दिया, जिससे मुआवजा राशि कई गुना बढ़ गई। यह मामला एसीबी में अपराध क्रमांक 30/2025 के तहत दर्ज है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7सी, 12 और आईपीसी की धारा 409, 467, 471, 420, 120-बी के तहत केस चल रहा है।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी साजिश
तीनों आरोपी पटवारी हैं, जिन्हें 29 अक्टूबर 2025 को एसीबी ने गिरफ्तार किया था। इनकी भूमिका और नुकसान का ब्योरा इस प्रकार है:
– **दिनेश पटेल** (तत्कालीन पटवारी, हल्का नंबर 49, ग्राम नायकबांधा): खाता दुरुस्ती और प्रपत्र-10 में फर्जीवाड़ा कर अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम टुकड़ों में बांटा। इससे सरकार को **30.82 करोड़ रुपये** का नुकसान।
– **लेखराम देवांगन** (तत्कालीन पटवारी, हल्का नंबर 24, ग्राम टोकरो): भुगतान प्रतिवेदन में हेरफेर कर मूल खसरा को उपखंडों में दिखाया, जिससे अतिरिक्त मुआवजा वसूल लिया गया। नुकसान: **27.16 करोड़ रुपये**।
– **बसंती घृतलहरे** (तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह): अवार्ड चरण में फर्जी विभाजन कर अधिक मुआवजा दिलवाया। नुकसान: **1.67 करोड़ रुपये**।
घोटाले का modus operandi: कैसे लूटा गया खजाना?
जांच एजेंसी के मुताबिक, पटवारी, मुआवजा प्राप्तकर्ता और अन्य सहयोगियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचा। मुख्य तरीके:
– सरकारी भूमि को निजी बनाकर दोबारा अधिग्रहण कर मुआवजा लेना।
– निजी जमीन के गलत या अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान।
– बैकडेटेड बंटवारा और नामांतरण कर फर्जी दावेदार तैयार करना।
– असली मालिक के बजाय किसी अन्य को पैसे पहुंचाना।
– जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर उपखंड बनाना, जिससे मुआवजा राशि फूल गई।
यह घोटाला न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाता है, बल्कि विकास परियोजनाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। एसीबी ने चार्जशीट में इन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सख्त सजा की मांग की है। जांच अभी जारी है, और अन्य संलिप्त लोगों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी अधिग्रहण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घोटालों से बचने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन और त्वरित ऑडिट जरूरी है।
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