
*कोरबा, 28 जनवरी 2026:* देशभर में बैंक कर्मचारियों की एक दिवसीय हड़ताल ने मंगलवार को बैंकिंग सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की लंबित मांग को लेकर बुलाई गई इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर ऊर्जाधानी कोरबा में देखने को मिला, जहां करीब 500 करोड़ रुपये के लेन-देन पर ब्रेक लग गया। किसानों से धान खरीदी के भुगतान से लेकर आम ग्राहकों की नकदी निकासी तक सब कुछ प्रभावित हुआ।
हड़ताल की शुरुआत सुबह से ही हो गई, जब राष्ट्रीयकृत बैंकों के सभी कर्मचारी और अधिकारी काम पर नहीं पहुंचे। निजी बैंकों पर भी इसका असर पड़ा, जिससे पूरे दिन काउंटर खाली पड़े रहे। ग्राहक बैंक शाखाओं के चक्कर काटते नजर आए, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। एटीएम मशीनों में नकदी की भारी किल्लत हो गई, जिससे कई जगह लंबी कतारें लग गईं।
#### नकदी वितरण पूरी तरह बाधित, चेस्ट बैंक का रोल महत्वपूर्ण
कोरबा जिले का प्रमुख चेस्ट बैंक होने के नाते एसबीआई की टीपी नगर स्थित मुख्य शाखा अन्य बैंकों को नकदी की आपूर्ति करती है। हड़ताल के चलते यह प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई। नतीजा यह हुआ कि नकद जमा, निकासी, चेक क्लियरिंग और अन्य सभी बैंकिंग सेवाएं ठप हो गईं। जिला सहकारी बैंक के माध्यम से चल रही धान खरीदी की समर्थन मूल्य भुगतान प्रक्रिया भी बुरी तरह प्रभावित हुई। प्रतिदिन करोड़ों रुपये के भुगतान के लिए नकदी की जरूरत होती है, लेकिन हड़ताल ने किसानों को भारी परेशानी में डाल दिया। कई किसान भुगतान की प्रतीक्षा में परेशान नजर आए।
एक प्रभावित किसान ने बताया, “धान बेचने के बाद पैसे मिलने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन बैंक बंद होने से सब व्यर्थ हो गया। अब कब खुलेगा, पता नहीं।” इसी तरह, छोटे व्यापारियों ने भी अपनी दैनिक लेन-देन में रुकावट की शिकायत की।
#### यूनियनों का एकमात्र मुद्दा: पुराना वादा पूरा करो
हड़ताल का एकमात्र कारण हफ्ते में पांच दिन की कार्य व्यवस्था लागू करना है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू)—जो नौ प्रमुख बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है—ने स्पष्ट किया कि सरकार ने इसकी घोषणा तो की थी, लेकिन इसे अमल में नहीं लाया गया। यूएफबीयू के एक पदाधिकारी ने कहा, “23 जनवरी को लेबर कमिश्नर स्तर पर बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं निकला। इसके बाद देशव्यापी हड़ताल का फैसला लिया गया। हमारी मांग जायज है और जल्द ही इसे पूरा किया जाना चाहिए।”
यूनियन के अनुसार, यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चलेगा और यदि मांग पूरी न हुई तो आगे और सख्त कदम उठाए जाएंगे। हड़ताल के समर्थन में देशभर के लाखों बैंक कर्मचारी सड़कों पर उतरे, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
#### आर्थिक नुकसान का अनुमान: कोरबा में 500 करोड़ का झटका
स्थानीय व्यापारिक संगठनों के अनुमान के मुताबिक, कोरबा में मंगलवार को 500 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन पर असर पड़ा। ऊर्जा क्षेत्र के अलावा कृषि और छोटे उद्योगों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी हड़तालें आर्थिक चक्र को धीमा करती हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां डिजिटल बैंकिंग की पहुंच सीमित है।








