
कोरबा, 29 जनवरी 2026 (विशेष संवाददाता): छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के वनांचल इलाके में आबकारी विभाग के दो अधिकारियों पर भोले-भाले आदिवासी ग्रामीणों से जबरन पैसे वसूलने का संगीन आरोप लगा है। रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक फूलसिंह राठिया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर तत्काल निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। विधायक के इस पत्र ने स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है और आदिवासी समुदाय में भय का माहौल पैदा हो गया है।
ग्रामीणों पर जेल की धमकी, पैसों की उगाही का आरोप
विधायक के पत्र में स्पष्ट रूप से आबकारी विभाग के उप निरीक्षक जया मेहर देवांगन और प्रधान आरक्षक संतोष राठौर के नाम लिए गए हैं। आरोप है कि ये अधिकारी ग्रामीणों को झूठे मामलों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी देकर पैसे ऐंठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वसूली का पैसा नहीं दिया गया, तो उनके खिलाफ मनगढ़ंत केस दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा। इस तरह की धमकियों से वनांचल क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में दहशत का आलम है, जहां आदिवासी परिवार अपनी आजीविका के लिए संघर्षरत हैं।
बरपाली गांव में विवाद: सरपंच पर भी फर्जी केस
पत्र में बरपाली ग्राम पंचायत (श्यांग थाना क्षेत्र) की घटना का विशेष उल्लेख किया गया है। कुछ दिनों पहले यहां आबकारी विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखा विवाद हो गया था। विभाग ने इस विवाद के बाद गरीब आदिवासी ग्रामीणों और ग्राम सरपंच के खिलाफ श्यांग थाने में शिकायत दर्ज करा दी। विधायक राठिया ने इसे ‘दबाव की राजनीति’ और ‘विरोध को दबाने की साजिश’ करार दिया है। उनका कहना है कि यह घटना विभागीय मनमानी का नंगा चेहरा दर्शाती है, जहां गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है।
“पद का दुरुपयोग, कानून से कोई डर नहीं”: विधायक का बयान
विधायक फूलसिंह राठिया ने पत्र के माध्यम से कहा, “ये अधिकारी अपने पद का घोर दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्हें कानून का जरा भी भय नहीं है। यह मामला अत्यंत गंभीर है, जो न केवल आदिवासी समाज के हितों को चोट पहुंचा रहा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।” उन्होंने मांग की है कि जांच तुरंत शुरू हो और दोषियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। राठिया ने यह भी जोर दिया कि ऐसी घटनाओं से वनांचल क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन की जांच पर टिकी उम्मीदें, पुराने विवादों पर भी सवाल
जिला प्रशासन अब इस पत्र पर कार्रवाई के मोड में आ गया है। यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हुई, तो आदिवासी बहुल इलाकों में लंबे समय से चली आ रही कथित वसूली की कई परतें उजागर हो सकती हैं। आबकारी विभाग पहले भी इसी तरह के विवादों में फंसा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीण संगठनों ने भी विधायक के इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र में ऐसी घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन विधायक के हस्तक्षेप से उम्मीद जगी है कि न्याय मिलेगा। जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है, जो इस मामले की दिशा तय करेगी।








