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छत्तीसगढ़: भारतमाला भूमि घोटाले में दो वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों की गिरफ्तारी, कोर्ट ने दी पुलिस रिमांड

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डी.के. सरजाल

 

      रायपुर, 11 फरवरी 2026

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छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण घोटाले को झकझोरने वाली बड़ी कार्रवाई हुई है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की संयुक्त टीम ने लंबे समय से फरार चल रहे दो वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों—तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और तत्कालीन नायब तहसीलदार—को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों की अब तक की सबसे निर्णायक सफलता माना जा रहा है, जो पूरे घोटाले की जड़ों तक पहुंचने का संकेत दे रही है।

कोर्ट ने स्वीकार की रिमांड की मांग

गिरफ्तारी के तुरंत बाद दोनों अधिकारियों को रायपुर के विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में पेश किया गया। ईओडब्ल्यू-एसीबी की टीम ने अदालत में दलील दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्तीय लेन-देन की जटिलताओं और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी के लिए आरोपियों से गहन पूछताछ जरूरी है। अदालत ने एजेंसी के तर्कों से सहमत होते हुए दोनों को तीन दिवसीय पुलिस रिमांड पर भेज दिया। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस अवधि में कई अहम सुराग मिल सकते हैं, जो घोटाले की गहरी परतें उजागर कर देंगे।

क्या है इस घोटाले का पूरा मामला?

भारतमाला परियोजना—देश की महत्वाकांक्षी सड़क अवसंरचना योजना—के तहत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण किया गया था। इसी प्रक्रिया के दौरान मुआवजे के वितरण में व्यापक अनियमितताओं के आरोप सामने आए। जांच में खुलासा हुआ कि कुछ राजस्व अधिकारियों ने बिचौलियों के साथ मिलीभगत कर भूमि रिकॉर्ड में हेराफेरी की। निजी और सरकारी जमीनों के दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर अपात्र व्यक्तियों को करोड़ों रुपये का मुआवजा दिलाया गया।

आरोपियों पर कमीशनखोरी, फर्जी दावेदार तैयार करने और जमीनों की प्रकृति बदलने जैसे गंभीर इल्जाम हैं। एजेंसियों के अनुसार, यह संगठित भ्रष्टाचार का एक सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें पटवारी, बिचौलिए और उच्च अधिकारी शामिल थे। इस मामले में पहले ही कई पटवारी और अन्य सहयोगी गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन कुर्रे और नायब तहसीलदार की गिरफ्तारी ने जांच को नई गति दी है।

फरारी से गिरफ्तारी तक: तकनीकी निगरानी की जीत

मामला दर्ज होने के बाद से दोनों अधिकारी जांच के दायरे से बाहर थे। ईओडब्ल्यू की टीम ने उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिशें दीं, लेकिन वे फरार बने रहे। अंततः तकनीकी इनपुट, सीसीटीवी फुटेज, निगरानी और मुखबिरों की सूचनाओं के आधार पर एजेंसी ने सटीक लोकेशन ट्रैक कर उन्हें हिरासत में लिया। सूत्रों के मुताबिक, फरारी के दौरान आरोपियों के संपर्क नेटवर्क और वित्तीय गतिविधियों की भी अलग से जांच चल रही है।

आगे की जांच: और खुलासों की उम्मीद

ईओडब्ल्यू-एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह मामला न केवल आर्थिक रूप से संवेदनशील है, बल्कि राज्य की विकास योजनाओं पर गहरा असर डालने वाला भी। रिमांड के दौरान बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेजी प्रमाण और अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका पर फोकस रहेगा। एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे घोटाले के मास्टरमाइंड और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को मजबूती देगी और अन्य विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संदेश देगी। जांच जारी है, और आगे के अपडेट के लिए नजर बनी रहेगी।

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