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योगी आदित्यनाथ के ‘हिंदुत्व’ पर शंकराचार्य का तीखा प्रहार: 20 दिन बाद ‘असली vs नकली’ हिंदू का खुलासा, माघ मेला विवाद ने भड़काया बवाल

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डी.के. सरजाल

           लखनऊ, 20 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘असली हिंदू’ होने पर सवाल उठाते हुए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें से अब केवल 20 दिन बाकी हैं। एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में शंकराचार्य ने चेतावनी दी कि समय सीमा समाप्त होने पर वे घोषणा करेंगे कि योगी ‘वास्तविक हिंदू’ हैं या ‘नकली’। उन्होंने 11 मार्च को लखनऊ में संत सभा बुलाई है, जहां शास्त्रीय प्रश्नों के आधार पर यह फैसला सुनाया जाएगा।

शंकराचार्य का यह बयान माघ मेला विवाद से उपजा है, जो जनवरी में प्रयागराज के संगम तट पर भड़का था। उन्होंने कहा, “बीजेपी में दो विचारधाराएं साफ दिख रही हैं—एक ‘अत्याचारी’ है, जो बटुकों (युवा साधुओं) का अपमान कर रही है, और दूसरा डैमेज कंट्रोल की कोशिश में लगा है।” गोरक्षा और वैराग्य जैसे मुद्दों पर योगी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा, “ये असली हिंदू हैं या वेशधारी, छद्म, ढोंगी?” यदि उत्तर न मिला, तो “सत्ता धर्म के विरुद्ध खड़ी मानी जाएगी।”

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माघ मेला: पालकी लौटाने से शुरू हुआ विवाद

विवाद की जड़ प्रयागराज में आयोजित माघ मेला है, जहां मौनी अमावस्या (जनवरी 2026) पर करोड़ों श्रद्धालु संगम स्नान के लिए पहुंचे थे। शंकराचार्य अपनी पारंपरिक पालकी पर अखाड़े से निकलकर संगम नोज की ओर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और उनके शिष्यों के बीच बहस हो गई। शंकराचार्य ने स्नान से इनकार कर पालकी बीच रास्ते से ही लौटा दी और मेला क्षेत्र छोड़ दिया। उन्होंने इसे “असली और नकली हिंदू” के बीच जंग का प्रतीक बताया।

मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को नोटिस जारी किया, जिसमें उनकी ‘शंकराचार्य’ पदवी को चुनौती दी गई। प्रशासन का कहना था कि यह परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण पालकी प्रक्रिया बाधित हुई। विपक्षी दलों ने इसे ‘हिंदू परंपराओं का अपमान’ बताया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने शंकराचार्य का समर्थन किया, जबकि बीजेपी ने उन्हें ‘फर्जी शंकराचार्य’ करार दिया।

बीजेपी का पलटवार: ‘फर्जी बाबा’ और राजनीतिक साजिश

भाजपा ने शंकराचार्य के बयानों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं ने अविमुक्तेश्वरानंद को ‘बद्रीनाथ का चोर’, ‘कांग्रेसाचार्य’ और ‘एनएसयूआई का पूर्व कार्यकर्ता’ कहा, जो छात्र जीवन में कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं।41af07 योगी आदित्यनाथ के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अभियान चलाया, जहां उन्हें ‘असली हिंदू’ बताते हुए शंकराचार्य को ‘नकली’ ठहराया। बागपत जैसे इलाकों में स्थानीय हिंदू संगठनों ने योगी के पक्ष में रैलियां कीं।

एक वायरल वीडियो में शंकराचार्य ने कहा, “वैरागी वेतन कैसे ले सकता है? गेरुआ वस्त्र पहनने वाला गौमांस कैसे बिकवा सकता है?”वहीं, बीजेपी प्रवक्ता ने जवाब दिया कि योगी का जीवन हिंदू धर्म रक्षा के लिए समर्पित है, और ऐसे बयान ‘वोटबैंक की राजनीति’ हैं।

11 मार्च: संत सभा में फैसला, क्या होगा असर?

शंकराचार्य ने 30 जनवरी को 40-दिन का समय दिया था, जो 11 मार्च को समाप्त होगा। लखनऊ में होने वाली इस संत सभा में ‘सच्चे हिंदू’ की परिभाषा पर बहस होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी लोकसभा चुनावों में हिंदुत्व की धुरी पर असर डाल सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश में।

यह घटनाक्रम हिंदू समाज में ‘असली vs नकली’ बहस को नई ऊंचाई दे रहा है, जहां धार्मिक परंपराएं राजनीतिक रंग ले रही हैं। दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, और 20 दिनों बाद का इंतजार पूरे देश की नजरों पर है।



 

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