
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ़), 20 फरवरी 2026 – विकास के नाम पर बनी सड़क अब मौत का खतरा बन गई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जोगीसार ग्राम पंचायत में नेशनल हाईवे-45 (NH-45) के चौड़ीकरण के बाद एक हैंडपंप सड़क के ठीक बीचों-बीच आ गया है। यह हैंडपंप अब ग्रामीणों के लिए वरदान नहीं, बल्कि बड़ी आपदा का कारण बन चुका है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच पानी भरने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले यह हैंडपंप सड़क के किनारे स्थित था, जो गांव की मुख्य जल स्रोत था। लेकिन NH-45 के चौड़ीकरण कार्य के दौरान सड़क को विस्तार दिया गया, जिससे हैंडपंप बीच सड़क पर आ फंसा। अब लोग बाल्टी या लोटा लेकर सड़क के मध्य में खड़े होकर पानी निकालते हैं। जरा सी लापरवाही या वाहन चालक की चूक से बड़ा हादसा हो सकता है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया, “साहब, अब सवाल यही है – प्यास बुझाएं या जान बचाएं? नया बोर करवाया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। हमारे पास यही एक हैंडपंप बचा है। तेज ट्रकों और बसों के बीच खड़े होकर पानी लेना पड़ता है। कब कोई बड़ा हादसा हो जाए, इसका डर हर समय सताता है।”
यह मामला सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। चौड़ीकरण के दौरान हैंडपंप को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय प्रशासन की थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यह घटना सड़क सुरक्षा, ग्रामीण जल आपूर्ति और विकास परियोजनाओं में समन्वय की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या अधिकारियों को किसी बड़े दुर्घटना का इंतजार है? स्थानीय लोग तत्काल हैंडपंप को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने, स्पीड ब्रेकर लगाने या वैकल्पिक पानी की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।









