
रायपुर, 10 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर जमकर निशाना साधा। दुर्ग और बलरामपुर जिलों में अफीम की खेती के मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने गृह मंत्री विजय शर्मा से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग कर दी। बघेल ने नक्सलवाद, हत्याओं और सरकारी आवासों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा, जिससे सदन में तीखी बहस छिड़ गई।
अफीम खेती का मामला: ‘सूचना दबाई गई, लीपापोती हो रही’
बघेल ने सदन में कहा कि सत्र के बीच ही दो जिलों में नशीली फसल की खेती का खुलासा होना सरकार की नाकामी को उजागर करता है। उन्होंने दावा किया कि 5 मार्च को दुर्ग जिले में अफीम की खेती की सूचना पुलिस को फोन पर दी गई थी और उस कॉल की रिकॉर्डिंग उनके पास सुरक्षित है। “जरूरत पड़ी तो इसे सदन के पटल पर रख दूंगा,” उन्होंने चेतावनी दी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। “मंत्री ने इसे मुखबिर की सूचना बताया, लेकिन हकीकत में पुलिस को पहले ही अलर्ट किया गया था। मुख्य आरोपी विनायक ताम्रकर को हथकड़ी क्यों नहीं लगाई गई? क्या पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है?” बघेल ने सवाल दागा। उन्होंने प्रदेशव्यापी जांच की मांग दोहराई, लेकिन इसी बीच बलरामपुर के कुसमी ब्लॉक से एक और अफीम खेती का केस सामने आ गया। “नशे की खेती बढ़ रही है, तो जिम्मेदारी कौन लेगा? अगर गृह मंत्री में थोड़ी भी नैतिकता बाकी है, तो इस्तीफा दे देना चाहिए,” बघेल ने कड़ा रुख अपनाया।
नक्सलवाद पर गरमाई बहस: झीरम हमले के आरोपों ने बढ़ाई तनातनी
चर्चा के दौरान नक्सलवाद का मुद्दा भी गरम हो गया। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया कि “नक्सलवाद के पनपने की जिम्मेदारी कौन लेगा?” इस पर वन मंत्री केदार कश्यप ने पलटवार किया, “जो सबूतों की बात करते हैं, वे तथ्य क्यों नहीं रखते?”
भूपेश बघेल ने जवाब में राज्य गठन के समय नक्सल प्रभाव को तीन जिलों तक सीमित बताते हुए कहा कि बाद में इसका विस्तार हुआ। उन्होंने 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का जिक्र किया, जिसमें कांग्रेस ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को खोया। “राज्य सरकार ने एसआईटी बनाई थी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सच सामने आना चाहिए,” बघेल ने कहा। उन्होंने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाया कि “झीरम हमले में शामिल नक्सलियों को नौकरी दी गई है।”
इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई। “झीरम में शामिल नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया है। ऐसे आरोप लगाना गलत और अपमानजनक है।” भाजपा विधायक सुनील सोनी ने समर्थन में कहा, “नक्सलवाद मिटाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का खजाना हमेशा खुला रहेगा।”
बघेल ने तंज कसते हुए कहा, “अगर सरकार 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने का दावा कर रही है, तो उस दिन जश्न मनाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं।” उन्होंने बस्तर में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा पर भी जोर दिया।
कानून-व्यवस्था पर सवाल: हत्याएं, हिरासत में मौतें और ‘कवर्धा सदन’
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भी चिंता जताई। “हत्या और चाकूबाजी की घटनाएं बढ़ रही हैं, पुलिस हिरासत में मौतें हो रही हैं। ताजा मामला गृह मंत्री के जिले कवर्धा से है, जहां एक बैगा आदिवासी नाबालिग की पिटाई के बाद मौत हो गई,” बघेल ने आरोप लगाया।
इसके अलावा, उन्होंने सरकारी आवासों के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। “कुछ मंत्री दो-दो बंगलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। गृह मंत्री ने ‘कवर्धा सदन’ बनवाया है—इसका बजट कहां से आया और किसकी अनुमति से? सदन को पूरी जानकारी दी जानी चाहिए।”
सदन की कार्यवाही: बहस के बाद स्थगन
इन तीखे हमलों के बीच सदन में हंगामा बढ़ गया, लेकिन स्पीकर ने बहस को आगे बढ़ाया। विपक्ष की मांगों पर सरकार ने कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन गृह मंत्री शर्मा ने कहा कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। बजट सत्र जारी है, और नक्सलवाद व कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे आगे भी चर्चा का केंद्र बने रहने की संभावना है।








