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कोरबा जिले में सब्जी क्रांति: धान की जगह गेहूं, दलहन और तिलहन की खेती बढ़ी, आमदनी दोगुनी!

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डी.के. सरजाल

,कोरबा: पानी की बचत और बेहतर आमदनी की तलाश में कोरबा जिले के किसान धान की पारंपरिक खेती छोड़कर कम पानी वाली फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। रबी सीजन में सब्जी का रकबा 19 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 24 हजार हेक्टेयर पहुंच गया है। साथ ही दलहन और तिलहन की खेती भी बढ़ रही है। कृषि विभाग के लक्ष्य के करीब पहुंचते हुए किसान अब टमाटर, आलू, प्याज, गोभी, गेहूं, चना और मटर जैसी फसलों से अच्छी कमाई कर रहे हैं।

कृषि विभाग ने इस रबी सीजन में कुल 40,730 हेक्टेयर रकबे का लक्ष्य रखा था, जिसमें से अब तक 40 हजार हेक्टेयर में फसल बो दी गई है। धान को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है, इसलिए इसका लक्षित रकबा 514 हेक्टेयर था, लेकिन किसानों ने केवल 365 हेक्टेयर में ही धान लगाया। इसके विपरीत गेहूं का रकबा 2,224 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। रागी की फसल भी 10 हेक्टेयर में बोई गई है।

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सब्जी और दलहन-तिलहन में उछाल

सब्जी उत्पादन में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पाली, पोड़ी-उपरोड़ा और करतला ब्लॉक में देखने को मिल रही है। यहां के किसान न सिर्फ स्थानीय बाजार, बल्कि पड़ोसी जिलों तक अपनी उपज पहुंचा रहे हैं। दलहन का कुल रकबा 8,088 हेक्टेयर है, जिसमें तिवरा (अरहर) सबसे आगे है- 2,628 हेक्टेयर। मटर का लक्ष्य 1,090 हेक्टेयर था, लेकिन किसानों ने 1,149 हेक्टेयर में बो दिया। उड़द की फसल 460 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 580 हेक्टेयर में लग चुकी है। चना का रकबा भी 1,382 हेक्टेयर पहुंच गया है।

तिलहन में मूंगफली की खेती खासतौर पर बढ़ रही है। अभी 657 हेक्टेयर में मूंगफली बोई जा चुकी है, जबकि गर्मी के मौसम में यह आंकड़ा 1,000 हेक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद है। सरसों और सूर्यमुखी की भी अच्छी खेती हो रही है।

तेल प्रोसेसिंग यूनिट ने दिया बढ़ावा

करतला ब्लॉक के किसानों ने मिलकर तेल प्रोसेसिंग यूनिट लगा ली है, जिससे मूंगफली की खेती को जबरदस्त प्रोत्साहन मिला है। कृषि विभाग अब पाली ब्लॉक में भी ऐसी यूनिट लगाने की योजना बना रहा है। नाबार्ड, कृषि और उद्यान विभाग के सहयोग से किसान बिना किसी बाहरी मदद के भी सब्जी की पैदावार बढ़ा रहे हैं।

ऑर्गेनिक खेती का नया ट्रेंड

शहर के किनारे खरमोरा और झगरहा के किसान ऑर्गेनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। झगरहा के एक किसान ने बताया, “चार एकड़ में धान की जगह सब्जी और गेहूं बोया। गोभी, चना, मटर के साथ गेहूं की फसल ली। रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया। अब लोग खुद खेत में आकर ताजी सब्जी ले जाते हैं। आमदनी दोगुनी हो गई है।”

बाजार पर असर

अभी दूसरे जिलों से सब्जी आती है, लेकिन जब लोकल उत्पादन बढ़ेगा तो कोरबा के बाजार में सब्जी के दाम अपने आप गिरेंगे। इससे उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा और किसानों की आय भी बढ़ेगी।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कम पानी वाली फसलों पर किसानों का यह फोकस जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा। आने वाले दिनों में और ज्यादा किसान इस मॉडल को अपनाएंगे, जिससे कोरबा न सिर्फ सब्जी का हब बनेगा बल्कि किसानों की खुशहाली भी बढ़ेगी।

 

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