
,,बिलासपुर, 27 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला न्यायालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की गंभीर धमकी मिली है। अज्ञात शरारती तत्वों ने ईमेल के माध्यम से भेजी गई इस धमकी के चलते पूरे न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया और बम निरोधक दस्ते (BDS) तथा डॉग स्क्वायड को तुरंत मौके पर भेजा गया।
सुरक्षा एजेंसियों ने न्यायालय के हर कोने, कमरों, गलियारों और परिसर की सघन तलाशी शुरू कर दी है। प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध वस्तुओं की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
लगातार तीसरी बार धमकी
जानकारों के मुताबिक, यह पिछले कुछ समय में बिलासपुर जिला न्यायालय को मिली तीसरी धमकी है। इससे पहले भी इसी तरह के ईमेल से न्यायालय परिसर में हड़कंप मचा चुका है। राज्य में हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय सहित कई अन्य जिला न्यायालयों (जैसे राजनांदगांव, दुर्ग आदि) को भी ऐसी ही बम धमकियां मिल चुकी हैं, जिन्हें बाद में जांच में होक्स (फर्जी) पाया गया था।
अधिवक्ताओं की चिंता
जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर वाजपेयी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने बताया कि आज न्यायालय पहुंचने पर न्यायाधीश के माध्यम से उन्हें इस ताजा धमकी की जानकारी मिली। वाजपेयी ने कहा, “यह केवल जिला न्यायालय तक सीमित नहीं है। इससे पहले उच्च न्यायालय को भी निशाना बनाने की धमकियां मिल चुकी हैं।”
उन्होंने परिसर की संवेदनशीलता पर जोर देते हुए बताया कि रोजाना यहां लगभग 1500 से 1600 वकील, दर्जनों न्यायाधीश और हजारों पक्षकार आते हैं। बार-बार ऐसी धमकियां न सिर्फ न्यायिक कार्यों में बाधा डाल रही हैं, बल्कि आम जनता में असुरक्षा की भावना भी पैदा कर रही हैं।
वाजपेयी ने शासन और जांच एजेंसियों से अपील की कि तकनीकी माध्यमों (साइबर सेल) का इस्तेमाल कर धमकी भरे ईमेल के मूल स्रोत का पता लगाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना न्यायिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पुलिस ने अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु बरामद होने की पुष्टि नहीं की है। जांच जारी है और साइबर टीम ईमेल की ट्रेसिंग कर रही है।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि पूरी तलाशी के बाद ही परिसर को सामान्य करने का फैसला लिया जाएगा। फिलहाल न्यायिक कार्य प्रभावित हुए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
यह लगातार हो रही धमकियां न केवल न्याय व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में न्यायिक संस्थानों की सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित कर रही हैं।








