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कोयलांचल में रसोई गैस का संकट: गेवरा-दीपका में महीनों से सिलेंडर की किल्लत, उपभोक्ताओं में आक्रोश

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डी.के. सरजाल

**कोरबा (दीपका/गेवरा)**: देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले कोयलांचल क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की भारी कमी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। **भारत गैस गेवरा प्रोजेक्ट कंज्यूमर्स को-आपरेटिव स्टोर्स लिमिटेड** के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन सिलेंडर मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। एसईसीएल (SECL) के कर्मचारी हो या आम घरेलू उपभोक्ता, सभी इस समस्या से जूझ रहे हैं और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

 अव्यवस्था और कालाबाजारी के आरोप

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उपभोक्ताओं का आरोप है कि सप्ताह में सिर्फ एक-दो बार गैस की गाड़ी आती है और उसमें भी सिलेंडरों की अनियमित वितरण और हेरा-फेरी हो रही है। बुकिंग करने के बावजूद कई महीनों से डिलीवरी नहीं हो पा रही है। रसूखदारों और बिचौलियों की साठगांठ के कारण आम आदमी खाली हाथ लौट रहा है। क्षेत्र में कालाबाजारी के आरोप भी लग रहे हैं, जहां कुछ लोग ऊंची कीमत देकर आसानी से सिलेंडर हासिल कर लेते हैं।

 घरेलू जीवन पर असर

गैस न मिलने का सीधा असर चूल्हे-चौके पर पड़ रहा है। कामकाजी महिलाएं और पुरुष समय पर खाना नहीं बना पा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि घर में ‘गृह-लक्ष्मी’ की खरी-खोटी सुननी पड़ रही है, जिससे पारिवारिक तनाव भी बढ़ गया है।

 सरकारी दावों पर सवाल

एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें गैस की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रही हैं, वहीं जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। कोयलांचल की जनता पूछ रही है कि अगर कमी नहीं है तो महीनों इंतजार क्यों? क्या यह वितरण व्यवस्था की विफलता है या बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार?

 

**नोट**: छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई शुरू की है। राज्य भर में सैकड़ों सिलेंडर जब्त किए गए हैं और दर्जनों एफआईआर दर्ज हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जिले में कुल मिलाकर किल्लत नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर आपूर्ति में देरी हो रही है। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर कई राज्यों में दिख रहा है।

 आंदोलन की चेतावनी

क्षेत्र की जनता और कर्मचारी संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के अंदर गैस वितरण व्यवस्था सुधारी नहीं गई और कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लगा तो धरना-प्रदर्शन, घेराव और बड़े स्तर पर जन-आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी गैस एजेंसी और स्थानीय प्रशासन की होगी।

 

स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से अपील की जा रही है कि इस समस्या को तुरंत हल किया जाए, ताकि कोयलांचल की जनता को राहत मिल सके।

 

(यह खबर स्थानीय उपभोक्ताओं की शिकायतों और हालिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। स्थिति में सुधार के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत है।

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