
रायपुर (छत्तीसगढ़), 11 अप्रैल 2026 – रायपुर रेंज पुलिस ने साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए शुरू किए गए ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत एक बड़े फर्जी सिम कार्ड रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस अंतरराज्यीय गिरोह के सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 300 से अधिक फर्जी एवं प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्डों का खुलासा किया है।
पुलिस जांच के दौरान दो अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों में यह रैकेट सामने आया। एक मामला माना थाना क्षेत्र का है, जिसमें लगभग 20.28 लाख रुपये की ठगी हुई थी, जबकि आजाद चौक थाना क्षेत्र में 6.42 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज था। दोनों मामलों में फर्जी सिम कार्डों और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था।
गिरोह कैसे काम करता था?
आरोपियों ने ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर e-KYC और d-KYC प्रक्रिया के जरिए अतिरिक्त सिम कार्ड एक्टिवेट किए। इन फर्जी सिमों को वे साइबर अपराधियों को ऊंची कीमत पर बेचते थे। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की ठगी में होता था, जैसे:
- टेलीग्राम टास्क फ्रॉड
- ऑनलाइन जॉब फ्रॉड
- फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाना
- शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड
- सस्ती चीजों के नाम पर ठगी
सिम सेवा प्रदाताओं के डेटा और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की। गिरोह का नेटवर्क रायपुर, दुर्ग, बालोदा बाजार सहित पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें शामिल हैं:
सुदीप्त सासमल (साहू मोबाइल, भनपुरी, रायपुर)
शिवनारायण साहू (रुद्रा मोबाइल, उरला)
और अन्य पांच आरोपी विभिन्न स्थानों से छापेमारी के दौरान कई मोबाइल उपकरण और प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं।
रायपुर रेंज पुलिस के अधिकारी ने बताया कि साइबर अपराधों को बढ़ावा देने वाले ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि सिम लेते समय अपने दस्तावेजों का दुरुपयोग न होने दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
वर्तमान में जांच जारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की पहचान कर रही है और अन्य संलिप्त लोगों को पकड़ने के प्रयास कर रही है। इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी के कई बड़े मामलों पर लगाम लगने की उम्मीद है।





