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कोरबा में ठेका मजदूरों का नया आंदोलन: अदानी बालको के बाद अब एनटीपीसी के गेट पर हड़ताल, 8 घंटे ड्यूटी और ओटी की मांग

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Written by
डी.के. सरजाल

 

*कोरबा (छत्तीसगढ़), अदानी बालको पावर प्लांट में ठेका मजदूरों के आंदोलन के कुछ ही दिनों बाद अब एनटीपीसी कोरबा में भी ठेका मजदूर सड़क पर उतर आए हैं। बुधवार को एनटीपीसी कोरबा के गेट नंबर-2 पर बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक एकत्रित हुए और उन्होंने काम बंद करने का ऐलान कर दिया।

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मजदूरों की मुख्य मांगें हैं:

  • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 8 घंटे की ड्यूटी के बाद अतिरिक्त काम (ओवरटाइम) पर ओटी भुगतान
  • केंद्र सरकार की तय दर पर नियमित पेमेंट
  • अन्य सुविधाओं का लाभ

मजदूरों का कहना है कि वे 8 घंटे से ज्यादा काम करते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ 8 घंटे की मजदूरी दी जाती है। ओवरटाइम का भुगतान नहीं मिलता और कई बार वेतन में देरी होती है। जब इन मांगों को लेकर वे प्रबंधन से बात करते हैं तो कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता।

घटना के दिन सुबह से ही सैकड़ों ठेका मजदूर एनटीपीसी गेट नंबर-2 पर जमा हो गए। उन्होंने काम बंद कर दिया, जिससे प्लांट के कुछ कामकाज पर असर पड़ा। एनटीपीसी प्रबंधन इस अचानक आंदोलन से सकते में आ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बुलाया गया। पुलिस की मदद से कुछ मजदूरों को गेट के अंदर बुलाकर समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकांश मजदूर अपनी मांगों पर अड़े रहे और काम पर लौटने को तैयार नहीं हुए।

मजदूर कैमरे के सामने खुलकर बोलने से परहेज कर रहे थे, लेकिन उन्होंने बताया कि उनकी लड़ाई सिर्फ वेतन और ओटी की है। कुछ अन्य सुविधाओं जैसे सामाजिक सुरक्षा, समय पर भुगतान और बेहतर काम की स्थिति भी उनकी मांगों में शामिल हैं।

पिछले आंदोलनों की कड़ी

यह आंदोलन अकेला नहीं है। पिछले महीने कोरबा के अदानी पावर प्लांट में ठेका मजदूरों ने इन्हीं मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। उसके बाद आंदोलन बालको में शिफ्ट हो गया, जहां तीन दिनों तक मजदूरों ने धरना दिया। अब यह लहर एनटीपीसी कोरबा तक पहुंच गई है। कोरबा के पावर सेक्टर में ठेका मजदूरों के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

एनटीपीसी प्रबंधन और पुलिस दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल बातचीत चल रही है, लेकिन मजदूरों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

स्थानीय लोगों और मजदूर संघों का कहना है कि पावर प्लांट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले ठेका मजदूरों को भी कानूनी अधिकार और सम्मानजनक मजदूरी मिलनी चाहिए।

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