
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पामगढ़ ब्लॉक के झूलन पकरिया धान मंडी (पकरिया धान उपार्जन केंद्र) से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां मंडी प्रभारी की कथित गंभीर लापरवाही के कारण हजारों क्विंटल धान खुले में जमीन पर पड़ा हुआ है।
धान को सुरक्षित रखने के लिए सरकार द्वारा डेनेज (प्लेटफॉर्म) और छल्ली (टार्पॉलिन/कवर) की व्यवस्था के लिए लाखों रुपये आवंटित किए जाते हैं, लेकिन मंडी में ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही। किसानों का आरोप है कि धान कंकड़-पत्थरों के ऊपर सीधे जमीन पर ढेर किया जा रहा है, जिससे बारिश या नमी आने पर यह खराब होने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है।
किसानों के गंभीर आरोप
एक स्थानीय किसान ने दावा किया है कि मंडी में प्रति बोरी धान का वजन 41 किलो 700 ग्राम तक लिया जा रहा है, जो नियमों के पूरी तरह खिलाफ है। सामान्यतः MSP पर धान खरीदी 50 किलो प्रति बोरी के हिसाब से होनी चाहिए, लेकिन यहां वजन में गड़बड़ी से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रशासन की अब तक क्या प्रतिक्रिया?
यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिले में पहले भी धान भंडारण में लापरवाही के कई मामले सामने आए हैं, जैसे अमरताल संग्रहण केंद्र में 4 लाख क्विंटल धान बारिश में भीगकर अंकुरित हो गया था। ऐसे में किसान संगठनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन और खाद्य विभाग पकरिया मंडी प्रभारी खिलाफ तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई करेगा? क्या दोषी पाए जाने पर वेतन रोकने, निलंबन या FIR जैसी कार्रवाई होगी, जैसा अन्य जिलों में लापरवाही के मामलों में देखा गया है?
किसान अब जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़ा आंदोलन बन सकता है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
क्या आप भी इस लापरवाही से प्रभावित हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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