
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में विकास के बड़े-बड़े दावे हो रहे हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पाली जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत मादन में महज 600 मीटर लंबी सड़क के लिए 20 लाख रुपये की लागत से बन रही सीसी रोड बनने के साथ ही टूट-फूट रही है। बीच-बीच में बड़ी-बड़ी दरारें उभर आई हैं, और घटिया निर्माण को छिपाने के लिए ऊपर से सीमेंट का मोटा लेप चढ़ाया जा रहा है।
यह सड़क मुख्यमार्ग फॉरेस्ट कास्टागार से गांव की बस्ती तक बनाई जा रही है, लेकिन निर्माण शुरू होते ही इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार, सरपंच और सचिव की मिलीभगत से मानक मोटाई कम रखी गई, घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और तकनीकी निगरानी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
यहां कुछ हकीकत सामने वाली तस्वीरें देखिए, जो इसी तरह की घटिया सीसी रोड की स्थिति दिखाती हैं – दरारें, उखड़ता कंक्रीट और छिपाने के लिए किया गया लेप:
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार सरपंच, सचिव और ठेकेदार से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने सुना नहीं। आखिरकार अब ग्रामीण जिलाधिकारी से सीधे मांग कर रहे हैं – घटिया निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए, जांच हो और करदाताओं के पैसे से मजबूत, टिकाऊ सड़क बनवाई जाए।
सवाल उठता है – जब सड़क बनते ही दरक रही है, तो जिम्मेदारी किसकी? सरपंच-सचिव की? ठेकेदार की? या उन अधिकारियों की जो निगरानी करते हैं?
कोरबा जैसे कोयला-समृद्ध जिले में विकास के नाम पर ऐसे घोटाले बार-बार सामने आ रहे हैं। क्या इस बार कार्रवाई होगी, या फिर फिर वही लीपापोती?
ग्रामीण अब कलेक्टर कार्यालय का रुख कर रहे हैं। देखना यह है कि क्या नई सरकार और नए कलेक्टर इस बार भ्रष्टाचार पर सख्त एक्शन लेते हैं या नहीं।
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