
रायपुर, 2 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में कांग्रेस को बड़ी नैतिक जीत मिली है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ED और EOW से जुड़े दोनों मामलों में जमानत देकर रिहा करने का आदेश दिया है। यह फैसला न केवल चैतन्य की निर्दोषता को प्रमाणित करता है, बल्कि केंद्र की BJP सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की राजनीतिक साजिश को भी बेनकाब करता है। करीब 168 दिनों की अन्यायपूर्ण हिरासत के बाद चैतन्य की रिहाई से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई है।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच (जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा) ने चैतन्य की जमानत याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के आरोप कमजोर और राजनीति से प्रेरित लगते हैं। ED द्वारा 18 जुलाई 2025 को की गई गिरफ्तारी और उसके बाद EOW की कार्रवाई को अदालत ने सवालों के घेरे में डाला। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस फैसले को “सत्य की जीत और लोकतंत्र की रक्षा” बताते हुए कहा, “यह BJP की केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही दमनकारी नीति का करारा जवाब है। फरार आरोपी पप्पू बंसल जैसे संदिग्ध व्यक्तियों के आधारहीन बयानों पर मेरे परिवार को फंसाया गया, लेकिन न्यायपालिका ने सच्चाई को पहचाना।”
कांग्रेस की मजबूत लड़ाई और जनता का समर्थन
भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ED और EOW जैसी एजेंसियां BJP के इशारों पर नाच रही हैं। “कांग्रेस नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हम नहीं झुकेंगे। जो दबाव में आ जाते हैं, वे BJP में शामिल हो जाते हैं, लेकिन कांग्रेस सत्य के साथ खड़ी है।” उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं, वकीलों और समर्थकों का आभार जताया, जिनकी तथ्यपूर्ण दलीलों ने अदालत में न्याय दिलाया। बघेल ने कहा कि यह फैसला पूरे देश में विपक्षी दलों के लिए प्रेरणा बनेगा, जहां BJP राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “यह कथित घोटाला BJP की साजिश है, जो भूपेश बघेल सरकार की सफल शराब नीति से जलन के कारण रची गई। राज्य को हजारों करोड़ का राजस्व देने वाली नीति को बदनाम करने की कोशिश की गई, लेकिन सच्चाई सामने आ गई। चैतन्य बघेल जैसे निर्दोष युवा को फंसाकर परिवार को तोड़ने की साजिश नाकाम हो गई।”
मामले की सच्चाई: राजनीतिक प्रतिशोध या घोटाला?
जांच एजेंसियां दावा करती हैं कि 2019-2022 के दौरान शराब नीति में अनियमितताएं हुईं, लेकिन कांग्रेस इसे पूरी तरह खारिज करती है। ED और EOW के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि कुल घोटाले की कथित राशि (₹2,000-3,500 करोड़) अतिरंजित है और कोई ठोस सबूत नहीं हैं। पूर्व IAS अनिल तुटेजा, सौम्या चौरसिया जैसे अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी को भी कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
जनता अब समझ रही है कि BJP की सरकारें विपक्ष को कमजोर करने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही हैं। कांग्रेस ने घोषणा की कि वे इस मामले में और मजबूती से लड़ेंगी और जनता के बीच जाकर BJP की साजिशों को उजागर करेंगी। चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद कांग्रेस ने राज्य में जश्न का माहौल बना लिया है, जो आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति को मजबूत करेगा।
यह फैसला साबित करता है कि न्यायपालिका अभी भी लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर फैसले लेती है। कांग्रेस ने कहा- “हमारी लड़ाई जारी रहेगी, सत्य जीतेगा!”









