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रायपुर (12 जनवरी 2026) – छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के अंतिम चरण में बड़ा राजनीतिक विवाद! प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार जानबूझकर धान खरीदी में व्यवधान पैदा कर रही है, ताकि किसानों का पूरा धान न खरीदा जा सके।
खरीफ सीजन 2025-26 की धान खरीदी में अब सिर्फ 15 दिन बचे हैं। इसी समय बड़े किसानों की भारी आवक मंडियों में होती है, लेकिन सरकार ने नोडल अधिकारियों के सामने ऐसी अव्यावहारिक शर्तें रखी हैं कि टोकन कटने के बावजूद उतना धान खरीदा ही न जाए। सुरेंद्र वर्मा ने दावा किया कि निर्देश साफ हैं – “जितना टोकन काटा, उससे कम धान खरीदो” – जिससे हर सोसाइटी में अब तक खरीदी काफी कम हुई है।
प्रदेश में अभी भी लगभग 5 लाख किसान ऐसे हैं जिन्होंने एक भी बोरा धान नहीं बेचा है। कांग्रेस का आरोप है कि अंतिम दिनों में आवक रोकने के लिए दुर्भावनापूर्ण षड्यंत्र रचा जा रहा है। एक तरफ रोजाना टोकन की संख्या में कटौती, दूसरी तरफ नए भौतिक सत्यापन ऐप के जरिए दबाव। पटवारियों को पिछले साल की खरीदी के आधार पर सत्यापन करने का आदेश दिया गया है, जिसका पटवारियों ने विरोध किया है।
खासकर रायगढ़ जिला पटवारी संघ के ज्ञापन का हवाला देते हुए सुरेंद्र वर्मा ने कहा – “रकबा समर्पण के नाम पर धान कम खरीदने की साजिश रची जा रही है। यह डबल इंजन वाली भाजपा सरकार का किसान-विरोधी चेहरा बेनकाब कर रहा है।”
कांग्रेस ने मांग की है कि ऐसे सभी किसान-विरोधी आदेशों को तुरंत रोका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
यह आरोप ऐसे समय में आया है जब धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू होकर 31 जनवरी 2026 तक चल रही है, और विपक्ष पहले भी विधानसभा में इस मुद्दे पर वॉकआउट कर चुका है। किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है – क्या सरकार अंतिम दिनों में खरीदी बढ़ाएगी या विवाद और गहराएगा?
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