
छत्तीसगढ़ में धान घोटाले को लेकर राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। कवर्धा और महासमुंद जिलों में सरकारी धान संग्रहण केंद्रों से करोड़ों रुपये मूल्य का धान गायब होने के मामले में अधिकारियों का दावा कि “चूहे और दीमक ने खा लिया” अब विपक्ष के लिए बड़ा हथियार बन गया है। कांग्रेस ने इसे भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश करार देते हुए राज्यव्यापी विरोध तेज कर दिया है।
मामला क्या है?
छत्तीसगढ़ के कवर्धा (कबीरधाम) जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान चारभाठा और बघर्रा जैसे संग्रहण केंद्रों से लगभग 26,000 क्विंटल धान की कमी सामने आई, जिसकी अनुमानित कीमत 7 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है। इसी तरह महासमुंद जिले में भी 18,000 से अधिक क्विंटल धान (लगभग 5-6 करोड़ रुपये मूल्य) का शॉर्टेज पाया गया। अधिकारियों ने नुकसान का कारण चूहे, दीमक, कीड़े, पक्षी और नमी के कारण सूखना बताया है।
यह दावा इतना अविश्वसनीय लगा कि विपक्ष ने इसे “भ्रष्टाचार को चूहों के सिर मढ़ने” की साजिश करार दिया। कांग्रेस का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान एक-दो चूहों से नहीं खाया जा सकता, बल्कि यह व्यवस्थित घोटाला है जिसमें रिकॉर्ड में हेराफेरी, फर्जी बिल और लापरवाही शामिल है।
कांग्रेस का तीखा विरोध
दुर्ग जिले में कांग्रेस ने इस मुद्दे पर शुक्रवार को बड़ा प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में दुर्ग कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर अभिजीत सिंह को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
दुर्ग जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बड़े आर्थिक नुकसान को छिपाने के लिए चूहों की कहानी गढ़ रही है। उन्होंने दावा किया:
- कवर्धा में करीब 7 करोड़ रुपये का धान गायब।
- महासमुंद में लगभग 5 करोड़ रुपये का नुकसान।
- बेजुबान जानवरों पर दोष मढ़ना दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकि असली दोषी भ्रष्ट अधिकारी और नेता बचाए जा रहे हैं।
- कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच (SIT या CBI स्तर की) की मांग की है।
- 20 जनवरी को ‘चूहा बारात’ निकलेगी
कांग्रेस ने विरोध को प्रतीकात्मक और आकर्षक बनाने का फैसला किया है। 20 जनवरी (मंगलवार) को दुर्ग कांग्रेस भवन से एक अनोखी ‘चूहा बारात’ निकाली जाएगी। यह बारात कलेक्ट्रेट तक पहुंचेगी, जहां कार्यकर्ता प्रतीकात्मक रूप से कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम चूहा (या चूहा संबंधित वस्तु) सौंपेंगे।
यह प्रदर्शन पहले कवर्धा में भी देखा गया, जहां कांग्रेसियों ने चूहा पकड़ने की जाली, पिंजरा आदि भेंट किए थे। अब दुर्ग में ‘बारात’ के जरिए सरकार पर तंज कसा जाएगा कि “चूहों की शादी करवा दो, ताकि वे और धान खा सकें”।
राजनीतिक प्रभाव
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया तूफान ला रहा है। कांग्रेस इसे किसान विरोधी सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बना रही है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में सरकार ने कई जिलों में 31 अधिकारियों को निलंबित किया है। भाजपा के कुछ नेताओं ने भी व्यंग्य किया कि “चूहों के इलाज के लिए बिल्लियां लानी पड़ेंगी”।
आने वाले दिनों में विरोध और तेज होने की संभावना है। यह धान घोटाला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है। कांग्रेस की ‘चूहा बारात’ जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन से सियासी संग्राम और रोचक होने वाला है।









