
कोरबा जिले में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। वन मंडल कोरबा क्षेत्र में वर्तमान समय में करीब 26 हाथी सक्रिय हैं, जिनकी वजह से ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल बना हुआ है। हाथी नियमित रूप से खेतों, बाड़ियों और गांवों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
हाल ही में दो दंतैल (नर) हाथियों ने ग्राम केराकछार और नवाडीह में किसानों की सब्जी की फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया। वहीं, 15 हाथियों के एक बड़े झुंड ने ग्राम चचिया के खेतों में घुसकर भारी तबाही मचाई। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी शाम ढलते ही सक्रिय हो जाते हैं और बाड़ियों व खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर रहे हैं।
झुंड में शामिल दंतैल हाथी अक्सर दल से अलग होकर गांव की ओर बढ़ते हैं, जिससे खतरा और भी अधिक बढ़ गया है। ग्रामीणों में यह आशंका भी जताई जा रही है कि हाथी जल्द ही धान खरीदी केंद्रों में भी घुस सकते हैं। हाल के दिनों में चचिया धान खरीदी केंद्र में ही एक दंतैल हाथी के घुसने की घटना सामने आई थी, जिससे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई थी और वन विभाग को उसे जंगल की ओर खदेड़ना पड़ा।
वन विभाग के अनुसार, नवापारा क्षेत्र में दो दंतैल हाथी घूम रहे हैं, जबकि मुख्य झुंड में सात बच्चे भी शामिल हैं। बच्चों की मौजूदगी के कारण झुंड गांवों के बहुत करीब नहीं आ रहा है, लेकिन फिर भी ग्रामीणों में डर बना हुआ है।
वन विभाग ने स्थिति पर सतर्क निगरानी रखी हुई है और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। हाथियों के इस बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए विभाग द्वारा विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन फसलों के नुकसान और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।









