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कोरबा में धान खरीदी व्यवस्था पर बवाल! पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने की ताबड़तोड़ जांच, भाजपा सरकार पर साधा निशाना

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डी.के. सरजाल

 

कोरबा, 28 दिसंबर 2025 – छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सीजन चल रहा है, लेकिन व्यवस्था में खामी के चलते किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। पूर्व राजस्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयसिंह अग्रवाल ने किसानों की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आज दादरखुर्द और नागिनभाठा धान खरीदी केंद्रों का औचक दौरा किया।
मौके पर पहुंचते ही पूर्व मंत्री ने केंद्रों पर मौजूद सैकड़ों किसानों और कर्मचारियों से सीधा संवाद किया। किसानों ने खुलासा किया कि:
तौल प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है
टोकन वितरण व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है
कई जगहों पर प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितताएं सामने आईं
जयसिंह अग्रवाल ने इन शिकायतों को सुनते ही मौके पर ही संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा,
“धान खरीदी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए। किसान अपनी मेहनत की फसल लेकर केंद्र पहुंचता है, उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।”
भाजपा सरकार पर जमकर बरसे पूर्व मंत्री
दौरान पूर्व मंत्री ने वर्तमान भाजपा सरकार (मुख्यमंत्री विष्णु देव साय) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“यह अव्यवस्था साफ दिखाती है कि भाजपा सरकार किसानों के प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं है। उनकी नीतियां और कार्यशैली किसान-विरोधी साबित हो रही हैं। पहले कांग्रेस सरकार में धान खरीदी समयबद्ध, पारदर्शी और किसान-हितैषी थी, लेकिन अब लापरवाही और अव्यवस्था का बोलबाला है।”
जयसिंह अग्रवाल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसानों के हक-हित से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने अधिकारियों को फिर से निर्देश दिया कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार खरीदी निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से हो, और किसानों की शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाए।
इस मौके पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर, पूर्व जिला अध्यक्ष नथूलाल यादव, कांग्रेस पार्षदगण, वरिष्ठ कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
प्रदेश में धान खरीदी का माहौल
बता दें कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में धान खरीदी को लेकर शिकायतें तेज हो गई हैं। टोकन जारी न होना, एग्रीटेक पोर्टल में गड़बड़ी, रकबा कम दिखना, तौल में देरी जैसी समस्याएं आम हैं। विपक्ष इसे सरकार की किसान-विरोधी नीति का नतीजा बता रहा है, जबकि सरकार डिजिटल व्यवस्था (तुंहर हाथ टोकन ऐप) से सुधार का दावा कर रही है।
क्या यह किसानों की आवाज दबेगी या सरकार सुनेगी?
आगे की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं। किसान अब इंतजार कर रहे हैं कि उनकी फसल को सम्मान और समय पर MSP (3100 ₹/क्विंटल) मिले या नहीं!

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