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जेल में 66 मौतें, एक आदिवासी नेता का मामला गर्माया: भूपेश बघेल ने लगाया ‘राजनीतिक साजिश’ का आरोप, कांग्रेस वॉकआउट

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डी.के. सरजाल

        रायपुर, 26 फरवरी 2026  छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन आज सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल ने राज्य की जेलों में कैदियों की मौतों का मुद्दा उठाते हुए विशेष रूप से कांकेर जिले के आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत पर सवाल दागे। विपक्ष ने इसे राजनीतिक साजिश और फर्जी केस में फंसाने का मामला बताते हुए जांच विधानसभा की समिति से कराने की मांग की, लेकिन गृह मंत्री विजय शर्मा के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस के सभी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

प्रश्नकाल में उठा मुद्दा: एक साल में 66 कैदियों की मौत

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प्रश्नकाल के दौरान भूपेश बघेल ने पिछले एक साल में प्रदेश की जेलों में हुई बंदियों की मौतों की विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने कांकेर जेल से जुड़े आदिवासी नेता जीवन ठाकुर और कवर्धा जेल में बंद पंकज साहू की मौतों पर विशेष जोर दिया। बघेल ने आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष और कांग्रेस से जुड़े नेता थे, जिन्हें फर्जी वन पट्टा मामले में फंसाकर जेल भेजा गया। उनके साथ उनके बेटे को भी जेल में डाला गया। बघेल ने कहा कि यह मामला कस्टोडियल डेथ का गंभीर उदाहरण है और इसमें राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका है।

जवाब में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन को बताया कि पिछले एक साल में राज्य की जेलों में कुल 66 बंदियों की मौत हुई है। इनमें से 18 मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में जांच जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन ठाकुर को कोर्ट के आदेश पर कांकेर जेल से रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था, जहां उनकी मौत हुई। पंकज साहू की मौत मांगी गई अवधि से पहले की है, इसलिए वह इस आंकड़े में शामिल नहीं है।

विपक्ष की मांग और वॉकआउट

भूपेश बघेल ने जीवन ठाकुर की मौत पर अविश्वास जताते हुए मांग की कि इसकी जांच मजिस्ट्रियल जांच के बजाय विधानसभा की प्रिविलेज या अन्य समिति से कराई जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। उन्होंने कहा कि आदिवासी नेता को फर्जी केस में फंसाया गया और जेल में उचित इलाज न मिलने से उनकी मौत हुई। गृह मंत्री इस मांग पर सहमत नहीं हुए और विभागीय जांच को ही पर्याप्त बताया।

इससे नाराज होकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में खड़े होकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। जब गृह मंत्री पर कोई असर नहीं हुआ, तो विपक्ष के सभी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। यह घटना सदन की कार्यवाही को प्रभावित करने वाली प्रमुख घटनाओं में से एक रही।

पृष्ठभूमि: जीवन ठाकुर की मौत दिसंबर 2025 में हुई

जीवन ठाकुर की मौत दिसंबर 2025 में रायपुर सेंट्रल जेल में हुई थी। फर्जी वन पट्टा बनाने के आरोप में कांकेर जेल में बंद थे, बाद में शिफ्टिंग के दो दिन बाद तबीयत बिगड़ने पर उनकी मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और सूचना न देने का आरोप लगाया था। मौत के बाद रायपुर जेल की महिला जेलर को हटाया गया था और आदिवासी समाज ने भी बड़े प्रदर्शन किए थे। बाद में उनके बेटे नीरज ठाकुर की भी मौत हो गई, जिससे मामला और गरमा गया।

यह घटना छत्तीसगढ़ की राजनीति में जेल सुधार, कस्टोडियल डेथ और आदिवासी नेताओं के खिलाफ कथित कार्रवाई के मुद्दे को फिर से उछाल रही है। विपक्ष का वॉकआउट बजट सत्र में तनाव का संकेत देता है, जबकि सरकार ने जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। आगे की कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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