
गरियाबंद, 10 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बार फिर सामने आ गई है। सोनोग्राफी कक्ष लंबे समय से बंद पड़ा है, जिसके कारण मरीज घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी अपनी जांच नहीं करा पा रहे हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरी सोनोग्राफी कराने वाले मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
अस्पताल पहुंचने वाले मरीज सुबह से ही डॉक्टर के इंतजार में लाइन लगाए बैठे हैं। सोनोग्राफी रूम के बंद होने की वजह से कई लोग बिना जांच के ही निराश होकर वापस लौट रहे हैं। एक महिला मरीज ने बताया, “हम घंटों से यहां इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सोनोग्राफी कक्ष बंद है। डॉक्टर भी साफ नहीं बता पा रहे कि यह कब खुलेगा।”
मशीन उपलब्ध, लेकिन सेवा नहीं
जिला अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन तो मौजूद है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर की कमी या अनुपस्थिति के कारण यह सुविधा बंद पड़ी हुई है। परिणामस्वरूप मरीजों को निजी अस्पतालों या बाहर के सेंटर्स में महंगे दामों पर जांच करानी पड़ रही है, जो गरीब परिवारों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।
यह समस्या पहली बार नहीं है। पहले भी गरियाबंद जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी और रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण सोनोग्राफी सेवा बार-बार बाधित होने की शिकायतें आ चुकी हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर सोनोग्राफी न हो पाना मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर रहा है।
प्रशासन से मांग
मरीजों और उनके परिजनों ने जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की तैनाती कर सोनोग्राफी सेवा को जल्द से जल्द बहाल किया जाए, ताकि आम लोगों को इस परेशानी से निजात मिल सके।
जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और सुविधा को बहाल करने की कोशिश की जा रही है।
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को फिर से उजागर करती है। गरियाबंद जैसे जिले में जहां दूर-दराज के क्षेत्रों से मरीज आते हैं, वहां बुनियादी जांच सुविधाओं का बंद रहना मरीजों के लिए बड़ी समस्या बन गया है।
नागरिकों से अपील की जाती है कि ऐसी किसी भी स्वास्थ्य सुविधा की कमी की सूचना स्वास्थ्य विभाग या जिला कलेक्टर कार्यालय को दें, ताकि समय रहते सुधार किया जा सके।




