
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की हालिया परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट (दिसंबर 2025 में संसद में पेश) ने 2015 से 2022 तक की योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां उजागर की हैं। यह योजना युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन रिपोर्ट से पता चलता है कि लाखों फर्जी लाभार्थी, बंद ट्रेनिंग सेंटर, डुप्लिकेट फोटो और फर्जी बैंक डिटेल्स जैसी समस्याएं रही हैं।
मुख्य खुलासे (CAG रिपोर्ट के आधार पर):
योजना के तीन चरणों (PMKVY 1.0, 2.0 और 3.0) में कुल लगभग 14,450 करोड़ रुपये का बजट था। इसका लक्ष्य 1.32 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन देना था, जिसमें 1.1 करोड़ को सर्टिफिकेट मिला।
लेकिन 94.53% लाभार्थियों के बैंक अकाउंट डिटेल्स अमान्य पाए गए—या तो ब्लैंक, ‘Null’, ‘N/A’, जीरो से भरे, या फर्जी नंबर जैसे ‘11111111111’, ‘123456…’ आदि। बाकी मामलों में भी 12,122 अकाउंट नंबर 52,381 लाभार्थियों में दोहराए गए।
मोबाइल नंबर और ईमेल में भी बड़े फर्जीवाड़े: 96% मोबाइल नंबर फर्जी या अमान्य, 97% असेसर (ट्रेनिंग जांचकर्ता) डिटेल्स संदिग्ध। एक ही ईमेल ID लाखों लोगों से जुड़ी मिली।
कई जगह एक ही फोटो कई लाभार्थियों के लिए इस्तेमाल हुई (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान में)।
कई ट्रेनिंग सेंटर भौतिक जांच में बंद पाए गए, लेकिन पोर्टल पर सक्रिय दिखाए जा रहे थे।
₹500 प्रोत्साहन राशि (DBT) का भुगतान भी कम हुआ: 2023 में सिर्फ 18.44% सफल, 2024 तक 63.75% तक पहुंचा। 34 लाख से ज्यादा सर्टिफाइड युवाओं को अभी तक पेमेंट नहीं मिला।
प्लेसमेंट (नौकरी) दर सिर्फ 41% रही, और ट्रेनिंग ज्यादातर कुछ ही जॉब रोल्स पर केंद्रित रही, मार्केट डिमांड से मेल नहीं खाती।
कांग्रेस ने इसे “मोदी सरकार का बड़ा घोटाला” बताते हुए जांच की मांग की है। उनका दावा है कि 10,000 करोड़ रुपये फर्जी लाभार्थियों पर खर्च हुए।
यह रिपोर्ट योजना की मॉनिटरिंग, डेटा वैरिफिकेशन और फंड यूज में कमजोरियों को दिखाती है। सरकार का कहना है कि बाद में आधार-लिंक्ड सिस्टम से सुधार हुआ, लेकिन CAG ने PMKVY 4.0 में भी कुछ खामियां बरकरार पाईं।
यह मुद्दा युवा बेरोजगारी के समय में काफी चर्चा में है, क्योंकि स्किल इंडिया जैसी योजनाओं से बड़े वादे किए गए थे, लेकिन क्रियान्वयन में इतनी गड़बड़ियां सामने आई हैं। अगर आपके पास कोई विशिष्ट सवाल है तो बताएं!








