
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के दावों के बीच छात्रावासों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विश्वविद्यालय के कई छात्रावास जर्जर अवस्था में बताए जा रहे हैं, जिससे वहां रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि छात्रावासों की इमारतों में जगह-जगह मरम्मत की आवश्यकता है। भवनों की खराब स्थिति के कारण विद्यार्थियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पर्याप्त छात्रावास उपलब्ध नहीं होने के कारण करीब 30 प्रतिशत विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें निजी आवास या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ रहा है।
जर्जर भवनों से सुरक्षा को लेकर चिंता
छात्रावासों की स्थिति को लेकर विद्यार्थियों के बीच सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आ रही हैं। पुराने और जर्जर भवनों में रहने वाले छात्रों का कहना है कि समय रहते आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव नहीं किया गया तो किसी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
विद्यार्थियों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रावासों का तकनीकी निरीक्षण कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन करे और जहां आवश्यक हो वहां तत्काल मरम्मत एवं पुनर्निर्माण की कार्रवाई की जाए।
30 फीसदी छात्रों को आवासीय सुविधा नहीं
विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में छात्रावासों की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 30 प्रतिशत विद्यार्थियों को हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलने से विशेषकर बाहर से आने वाले छात्रों को रहने की व्यवस्था करने में परेशानी होती है।
छात्रों का कहना है कि शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षित और पर्याप्त आवासीय सुविधा भी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में नए छात्रावासों का निर्माण और मौजूदा छात्रावासों का उन्नयन आवश्यक है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि जर्जर छात्रावासों की स्थिति की गंभीरता से समीक्षा की जाए। साथ ही, सुरक्षा मानकों की जांच, आवश्यक मरम्मत, मूलभूत सुविधाओं में सुधार तथा जरूरत के अनुसार नए छात्रावासों का निर्माण कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर आवासीय वातावरण मिल सके।
छात्रों का कहना है कि शिक्षा के लिए आने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए।









