
@ लोकपरंपरा, भाईचारे और छत्तीसगढ़िया संस्कृति के रंग में रंगा रहा पूरा गांव
जवाली। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा, संस्कृति एवं भाईचारे के प्रतीक भोजली विसर्जन पर्व को ग्राम जवाली में बड़े ही उत्साह, उमंग और भक्तिभाव के साथ धूमधाम से मनाया गया। भोजली पर्व के अवसर पर पूरा गांव छत्तीसगढ़िया संस्कृति और लोक परंपराओं के रंग में रंगा नजर आया।
आयोजन को भव्य एवं गरिमामय बनाने के लिए विगत दो दिनों से विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रथम दिवस महिला मंडली द्वारा भक्ति कीर्तन का आयोजन किया गया, वहीं द्वितीय दिवस रामायण मंडली द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया गया। धार्मिक आयोजनों के चलते पूरे गांव में भक्तिमय वातावरण बना रहा और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
विभिन्न मोहल्लों से निकली 128 भोजली
भोजली विसर्जन के दिन ग्राम के विभिन्न मोहल्लों से विधिवत तैयार की गई भोजलियों को लेकर महिलाएं एवं बहनें उत्साहपूर्वक विसर्जन यात्रा में शामिल हुईं। इसमें बाजारपारा से 80, बाबा मोहल्ला से 24, सड़क मोहल्ला से 8 तथा कोनहापारा से 16 भोजली शामिल रहीं।
लगभग सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में भोजली विसर्जन यात्रा मां ऑडियो डीजे की धुनों के साथ निकाली गई। यात्रा ग्राम के प्रमुख चौक-चौराहों से होते हुए खोलार नदिया पहुंची, जहां विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ भोजली का विसर्जन किया गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोकपरंपरा और ग्रामीण भाईचारे की मनमोहक झलक देखने को मिली।
जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थित
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला पंचायत सदस्य सुषमा रवि रजक, जनपद सदस्य कमल बेलदार, विधायक प्रतिनिधि नरेंद्र तांडिया सहित मनोज कुमार पटेल, केशी कुमार आदिवासी, महिपाल, गोपाल, सूरीत लाल, भूपेंद्र कुमार, थान सिंह, शिवा, हेमलाल एवं वीरेंद्र नामदेव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
महिलाओं और युवाओं की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम संयोजक दीपक पटेल के मार्गदर्शन में आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। महिला प्रमुख कांतिबाई, कमलाबाई, सुमित्राबाई, रिमलाबाई, खररामती एवं पथीन सहित महिलाओं ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं बहनों के दल में शारदा, पूजा, पूनम एवं दुर्गेश नंदनी ने सक्रिय सहभागिता निभाई। पूरे विसर्जन कार्यक्रम को सफल बनाने में विनीत कुमार एवं रामकुमार का सराहनीय योगदान रहा। पूजा कार्य में छेदीलाल बैंगा ने भी सहयोग प्रदान किया।
आयोजन समिति ने की स्वल्पाहार की व्यवस्था
भोजली विसर्जन से पूर्व आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं एवं उपस्थित ग्रामीणों के लिए स्वल्पाहार की विशेष व्यवस्था की गई। पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों में उत्साह और भाईचारे का माहौल देखने को मिला।
ग्राम जवाली में आयोजित भोजली विसर्जन पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पारंपरिक पर्व आज भी ग्रामीण समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं।








