
@ जवाली। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जवाली में आदिवासी समाज द्वारा पहली बार भव्य एवं उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा, सामाजिक एकता और जल-जंगल-जमीन व पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी संस्कृति प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और संरक्षण की समृद्ध परंपरा की प्रतीक है। 
कार्यक्रम की शुरुआत पेन पुरुषों एवं देवी- देवताओं की पूजा-अर्चना और सेवा-अर्जी से हुई। इसके बाद ‘सेवा जोहार’ और पारंपरिक गीतों के साथ रैली निकाली गई। महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल होकर ग्राम के प्रमुख चौक-चौराहों पर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित किया।
पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ वृक्षारोपण किया गया तथा कंवर समाज भवन के प्रस्तावित स्थल एवं दान में प्राप्त भूमि पर संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के बाद उपस्थित लोगों के लिए खिचड़ी प्रसाद की व्यवस्था की गई। मंचीय कार्यक्रम में अतिथियों और भूमि दानदाताओं का गमछा एवं श्रीफल से सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में समाज को शिक्षित, जागरूक और संगठित होकर अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया गया। आगामी वर्षों में समाज भवन निर्माण, पेयजल व्यवस्था तथा पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ आदिवासी संस्कृति की रैली एवं झांकी आयोजित करने को लेकर भी महत्वपूर्ण संकल्प लिए गए।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य सुषमा रवि रजक, जनपद सदस्य कमल बेलदार, सामाजिक अध्यक्ष लतलू गोटिया सहित माया रूपेश कंवर (अधिवक्ता), विजय प्रताप सिंह, संतोष कंवर, राज नारायण, भुवन पाल, मंगल सिंह बैगा, मोहर सिंह, ओमप्रकाश, राज सिंह, जगदीश गुरुजी, राजेंद्र कंवर, जयपाल सिंह, भुवनेश्वर, महेन्द्रपाल, संजू सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
आयोजन को शांतिपूर्ण एवं सफल बनाने में बाकी मोंगरा क्षेत्र के पुलिस प्रशासन का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम ने आदिवासी संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और सामाजिक एकता के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को मजबूती से सामने रखा।

विश्व आदिवासी दिवस पर जवाली




